विक्रम राठौर: घरेलू क्रिकेट के महारथी से टीम इंडिया के भरोसेमंद कोच तक

विक्रम राठौर – भारतीय क्रिकेटर और मौजूदा बल्लेबाज़ी कोच, जिन्होंने घरेलू क्रिकेट में रिकॉर्ड बनाए और टीम इंडिया के खिलाड़ियों को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया।

प्रस्तावना: 90 के दशक का उभरता सितारा

भारतीय क्रिकेट में 90 का दशक कई नए चेहरों का दौर था। इसी समय एक नाम लगातार सुर्खियों में रहा – विक्रम राठौर।

26 मार्च 1969 को पंजाब के जालंधर में जन्मे राठौर, दमदार दाएँ हाथ के ओपनिंग बल्लेबाज़ रहे। उनकी बल्लेबाज़ी का अंदाज़ क्लासिक था… सीधी बैट, बेहतरीन टाइमिंग और भरोसेमंद तकनीक।

भले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका करियर लंबा न चला, लेकिन घरेलू क्रिकेट और कोचिंग में उन्होंने जो छाप छोड़ी, वह उन्हें भारतीय क्रिकेट का अहम चेहरा बनाती है।

विक्रम राठौर का शुरुआती जीवन और क्रिकेट में कदम

• जन्म: 26 मार्च 1969, जालंधर, पंजाब

• बचपन से ही क्रिकेट के प्रति गहरी रुचि।

• स्कूल और कॉलेज स्तर पर शानदार बल्लेबाज़ी ने उन्हें पंजाब की रणजी टीम तक पहुँचाया।

• घरेलू क्रिकेट में वह जल्दी ही टीम के भरोसेमंद ओपनर बन गए।

घरेलू क्रिकेट का चमकता सितारा

विक्रम राठौर ने रणजी ट्रॉफी और घरेलू टूर्नामेंट्स में धूम मचा दी।

• फर्स्ट क्लास मैच: 146

• कुल रन: 11,473

• औसत: 49.66

• शतक: 33

• अर्धशतक: 49

यह आँकड़े बताते हैं कि राठौर घरेलू क्रिकेट के स्तंभ क्यों कहे जाते हैं।

उन्होंने पंजाब की ओर से कई यादगार पारियां खेलीं और लगातार रन बनाकर चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा।

भारतीय टीम में चयन और अंतरराष्ट्रीय करियर

1996 में इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स टेस्ट में राठौर ने डेब्यू किया। यह हर क्रिकेटर का सपना होता है और उन्होंने इसे पूरा किया।

• टेस्ट मैच: 6

• कुल रन: 131

• सर्वश्रेष्ठ स्कोर: 44

• वनडे मैच: 7

• कुल रन: 197

• सर्वश्रेष्ठ स्कोर: 63

हालांकि उनका करियर लंबा नहीं चला। उस दौर में भारतीय बल्लेबाज़ी लाइनअप में सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़ और सचिन तेंदुलकर जैसे दिग्गज मौजूद थे। ऐसे में राठौर के लिए अपनी जगह पक्की करना मुश्किल हो गया।

घरेलू क्रिकेट में लीजेंड का दर्जा

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौके कम मिले, लेकिन राठौर ने घरेलू मैदानों पर कभी हार नहीं मानी।

• उन्होंने पंजाब के लिए कई शतक ठोके।

• लिस्ट A क्रिकेट में भी उन्होंने 3000+ रन बनाए।

• उनकी बल्लेबाज़ी हमेशा भरोसे का प्रतीक रही।

यही वजह है कि उन्हें “घरेलू क्रिकेट का महारथी” कहा जाता है।

क्रिकेट से कोचिंग की ओर सफर

रिटायरमेंट के बाद विक्रम राठौर ने कोचिंग को अपना नया मिशन बनाया।

• पंजाब और हिमाचल की टीमों के कोच बने।

• उनकी गाइडेंस में कई युवा खिलाड़ी निखरकर सामने आए।

• 2019 में उन्हें भारतीय टीम का बल्लेबाज़ी कोच नियुक्त किया गया।

उनके कोचिंग करियर में सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने खिलाड़ियों को सिर्फ तकनीक नहीं सिखाई, बल्कि मानसिक मजबूती पर भी काम किया।

बल्लेबाज़ी कोच के रूप में सफलता

राठौर की कोचिंग में भारत की बल्लेबाज़ी में स्थिरता और आत्मविश्वास देखने को मिला।

• रोहित शर्मा – लगातार बड़ी पारियां खेलते रहे।

• विराट कोहली – करियर के उतार-चढ़ाव में राठौर की सलाह अहम रही।

• शुभमन गिल – नई पीढ़ी के स्टार के रूप में उभरे।

टी20 वर्ल्ड कप 2022 और वनडे वर्ल्ड कप 2023 में भारतीय बल्लेबाज़ी को मज़बूत बनाने में उनका बड़ा योगदान रहा।

विक्रम राठौर की कोचिंग शैली

• शांत और गंभीर कोच – खिलाड़ियों को मानसिक रूप से स्थिर रखते हैं।

• तकनीकी सुधार पर फोकस – शॉट सेलेक्शन और बैटिंग पोजिशन पर विशेष ध्यान।

• युवा खिलाड़ियों के मेंटर – नए टैलेंट को निखारने में माहिर।

उनकी कोचिंग से यह साफ है कि भारतीय क्रिकेट की नई पीढ़ी सही हाथों में है।

विक्रम राठौर की प्रेरणादायक यात्रा

विक्रम राठौर का करियर हर उस क्रिकेटर के लिए प्रेरणा है, जिसे शुरुआती झटके लगे हों।

• इंटरनेशनल करियर छोटा रहा।

• लेकिन घरेलू क्रिकेट में उन्होंने बड़ा नाम कमाया।

• कोचिंग से भारतीय क्रिकेट में अमूल्य योगदान दिया।

उनका जीवन संदेश है – “अगर एक रास्ता बंद हो जाए, तो दूसरा बनाओ और वहाँ सफलता हासिल करो।”

निष्कर्ष

विक्रम राठौर सिर्फ एक क्रिकेटर नहीं, बल्कि संघर्ष और मेहनत की मिसाल हैं।

• खिलाड़ी के रूप में उन्होंने क्लासिक बल्लेबाज़ी का नमूना पेश किया।

• घरेलू क्रिकेट में उनका नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज है।

• कोच के रूप में उन्होंने भारत को नई बल्लेबाज़ी ताकत दी।

आज वह हर युवा क्रिकेटर के लिए प्रेरणा हैं कि मेहनत कभी बेकार नहीं जाती। पंजाब का यह सितारा हमेशा भारतीय क्रिकेट के इतिहास में चमकता रहेगा।

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