स्मृति मंधाना ने विराट कोहली का रिकॉर्ड तोड़कर इतिहास रचा। जानिए कैसे उनका खेल, माइंडसेट और रेज़िलिएंस कोहली से तुलना के काबिल बनाते हैं।
परिचय: स्मृति मंधाना और विराट कोहली की तुलना क्यों?
क्रिकेट की दुनिया में जब भी कोई नया सितारा चमकता है, उसकी तुलना अक्सर किसी महान खिलाड़ी से की जाती है। पाकिस्तान के बाबर आज़म को “अगला कोहली”, बांग्लादेश के तमिम इकबाल को “कोहली जैसा” और यहां तक कि अहमद शहजाद को भी “कोहली का कॉपी” कहा गया। मगर सच्चाई यह है कि विराट कोहली जैसा बनना सिर्फ रन बनाने या रिकॉर्ड तोड़ने का नाम नहीं है।
कल रात स्मृति मंधाना ने 413 रन का पहाड़ जैसा लक्ष्य चेज़ करते हुए जो पारी खेली, उसने पहली बार यह अहसास कराया कि किसी महिला क्रिकेटर की तुलना विराट कोहली से करना बेमानी नहीं है।
विराट कोहली: सिर्फ रिकॉर्ड नहीं, बल्कि माइंडसेट का दूसरा नाम
जब भी क्रिकेट प्रेमी “किंग कोहली” का नाम लेते हैं, तो उनके दिमाग में 70+ अंतरराष्ट्रीय शतक, chase master टैग और फिटनेस की मिसाल आती है। लेकिन असली कोहली सिर्फ इन नंबरों तक सीमित नहीं हैं।
कोहली का असली हथियार – रेज़िलिएंस
कोहली के करियर के कई ऐसे पल रहे जब पूरी टीम हार मान चुकी थी, लेकिन कोहली ने अपने जज़्बे से मैच खींच लिया। यही वजह है कि उन्हें resilient mindset का जीता-जागता उदाहरण कहा जाता है।
किसी भी इंसान के लिए कामयाबी पाना मुश्किल नहीं, लेकिन उस कामयाबी का बोझ उठाकर आगे बढ़ना सबसे कठिन है। विराट ने यह काम करके दिखाया।
स्मृति मंधाना: भारतीय महिला क्रिकेट की ‘चेज मास्टर’
स्मृति मंधाना ने लंबे समय से भारतीय महिला टीम के लिए शानदार प्रदर्शन किया है। परंतु, बड़े मौकों पर उनकी निरंतरता पर सवाल उठते रहे। कई बार लोग कहते थे – “ये खिलाड़ी टैलेंटेड है, लेकिन कोहली जैसी क्लच परफॉर्मेंस नहीं देती।”
कल रात का मैच: रिकॉर्ड और इतिहास
413 रन का टारगेट क्रिकेट के किसी भी प्रारूप में आसान नहीं होता। बड़े-बड़े बल्लेबाज इस दबाव में टूट जाते हैं। लेकिन मंधाना ने जिस आत्मविश्वास से यह पारी खेली, उसने पहली बार लोगों को विश्वास दिलाया कि वह कोहली जैसी मानसिकता लेकर खेल सकती हैं।
कोहली बनाम मंधाना: रिकॉर्ड्स की तुलना
लोग अक्सर क्रिकेटरों को आंकड़ों के तराजू में तोलते हैं। आइए देखें कि कोहली और मंधाना की तुलना किन पहलुओं पर की जाती है।
रन और शतक
• विराट कोहली: 70+ अंतरराष्ट्रीय शतक, chase master का खिताब।
• स्मृति मंधाना: महिला क्रिकेट में अब तक दर्जनों मैच जिताऊ पारियां, कई रिकॉर्ड अपने नाम।
बड़े मौकों पर प्रदर्शन
• कोहली: आईसीसी टूर्नामेंट्स में कई बार भारत को मुश्किल परिस्थितियों से निकालकर लाए।
• मंधाना: हालिया पारी ने साबित किया कि दबाव की घड़ी में भी वह अडिग रह सकती हैं।
माइंडसेट
• कोहली: कभी हार न मानने वाला रवैया।
• मंधाना: कल की पारी से यह साफ हुआ कि उनमें भी वही जज़्बा है।
कोहली जैसा बनने की असली कसौटी – माइंडसेट
लोग गलतफहमी पाल लेते हैं कि कोहली जैसा बनने के लिए उसके रन या फिटनेस की बराबरी करनी होगी। लेकिन हकीकत यह है कि कोहली जैसा बनने के लिए सिर्फ उसका माइंडसेट अपनाना होगा।
चाहे आप क्रिकेटर हों, या किसी दफ्तर में नौकरी करते हों, या फिर सड़क किनारे ठेला लगाते हों – अगर आप मुश्किल हालात में हार न मानें, तो आप भी अपनी फील्ड का कोहली बन सकते हैं।
स्मृति मंधाना और भारतीय महिला क्रिकेट का नया युग
मंधाना की यह पारी सिर्फ उनके करियर के लिए ही नहीं बल्कि भारतीय महिला क्रिकेट के लिए भी ऐतिहासिक है।
1. यह दिखाती है कि महिला क्रिकेटर भी उतने ही दबाव झेल सकती हैं जितना पुरुष क्रिकेटर।
2. यह पारी भारतीय महिला टीम को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दिलाएगी।
3. इससे आने वाली पीढ़ी की लड़कियां प्रेरित होंगी कि अगर मंधाना कर सकती हैं, तो वे भी कर सकती हैं।
क्रिकेट से ज़िंदगी तक: कोहली और मंधाना का संदेश
कोहली और अब मंधाना हमें यही सिखाते हैं कि जीवन में कितनी भी मुश्किलें क्यों न आएं, अगर आपके अंदर रेज़िलिएंस है, तो कोई भी बाधा आपको रोक नहीं सकती।
• अगर आप कोहली के फैन हैं लेकिन छोटी-सी परेशानी में टूट जाते हैं, तो आपने कोहली को सिर्फ समझा है, जिया नहीं।
• अगर आप स्मृति मंधाना की पारी देखकर बस वाह-वाह कर रहे हैं लेकिन अपनी ज़िंदगी की चुनौतियों में हार मान जाते हैं, तो आपने उनकी असली सीख नहीं अपनाई।
निष्कर्ष: कोहली और मंधाना – रिकॉर्ड से ज्यादा, माइंडसेट की मिसाल
रिकॉर्ड तो टूटते ही रहते हैं। अहमद शहजाद, बाबर आज़म, और कई खिलाड़ियों को “अगला कोहली” कहा गया, लेकिन कोहली जैसा बनने के लिए सिर्फ आंकड़े काफी नहीं।
स्मृति मंधाना ने पहली बार यह साबित किया कि वह न सिर्फ रिकॉर्ड तोड़ सकती हैं, बल्कि उस मानसिकता को भी अपनाकर दिखा सकती हैं जिसने कोहली को किंग कोहली बनाया।
तो अगली बार जब भी कोई खिलाड़ी कोहली से तुलना के लायक बने, तो ध्यान रखिए – बात सिर्फ रन या शतक की नहीं है, बल्कि उस resilient mindset की है, जो किसी को भी अपनी फील्ड का कोहली बना सकता है।
