अजीत आगरकर की एडिलेड जीत: बॉम्बे डक से हीरो तक

भारतीय क्रिकेटर सफेद टेस्ट जर्सी में विकेट लेने के बाद दोनों हाथ उठाकर जश्न मनाते हुए।

प्रस्तावना: बॉम्बे डक से शुरू हुई कहानी

भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कई ऐसे खिलाड़ी रहे जिन्होंने आलोचनाओं और असफलताओं के बाद खुद को नए सिरे से साबित किया। उन्हीं में से एक नाम है अजीत आगरकर। साल 2000 में जब उन्होंने लगातार सात टेस्ट पारियों में शून्य (0) पर आउट होकर रिकॉर्ड बनाया, तो मीडिया और प्रशंसकों ने उन्हें ताना मारते हुए “बॉम्बे डक” कहना शुरू कर दिया। यह नाम उनके लिए बोझ भी बना और चुनौती भी।

लेकिन यही खिलाड़ी तीन साल बाद ऑस्ट्रेलिया की सरज़मीं पर भारत को एक ऐतिहासिक जीत दिलाने में नायक बन गया।

बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी 2003: भारत का सपना

एडिलेड टेस्ट का पृष्ठभूमि

भारत 2003 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गया था। पहला टेस्ट ब्रिसबेन में हुआ, जहां मैच ड्रॉ रहा। लेकिन भारतीय टीम के पास आत्मविश्वास आ चुका था। असली चुनौती थी एडिलेड टेस्ट, जहां ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 556 रन का पहाड़ खड़ा कर दिया।

इसके जवाब में भारत ने भी दमखम दिखाया और 523 रन बनाए। मैच बराबरी पर था, लेकिन नतीजा अभी बाकी था।

अजीत आगरकर का करिश्मा: 6 विकेट की जादुई गेंदबाज़ी

ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी की शुरुआत हुई। ओपनर जस्टिन लैंगर और मैथ्यू हेडन क्रीज़ पर थे। तीसरे ओवर में ही आगरकर ने लैंगर को आउट कर दिया। इसके बाद जैसे विकेटों की झड़ी लग गई—रिकी पोंटिंग, साइमन कैटिच, एडम गिलक्रिस्ट—सब आगरकर की स्विंग और सटीक लाइन-लेंथ का शिकार बने।

आगरकर का फाइनल आंकड़ा था: 16 ओवर, 41 रन, 6 विकेट।

उनकी गेंदबाज़ी ने ऑस्ट्रेलिया को सिर्फ 196 रन पर ढेर कर दिया।

द्रविड़ और लक्ष्मण: जीत के असली शिल्पकार

भारत के सामने लक्ष्य था 233 रन। दबाव बहुत था क्योंकि ऑस्ट्रेलिया अपनी धरती पर शायद ही हारता था। लेकिन राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण की साझेदारी ने चमत्कार कर दिखाया।

• द्रविड़ ने शतक पूरा किया और अंत तक टिके रहे।

• लक्ष्मण ने एक बार फिर ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ों को परेशान किया।

भारत ने यह लक्ष्य 6 विकेट खोकर हासिल किया और 20 साल बाद पहली बार ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट जीत दर्ज की।

बॉम्बे डक से हीरो तक: आगरकर की वापसी

यह जीत सिर्फ टीम इंडिया के लिए नहीं, बल्कि आगरकर के व्यक्तिगत करियर के लिए भी मील का पत्थर थी।

• कभी जिन्हें उनकी बल्लेबाज़ी के कारण नाकाम खिलाड़ी कहा जाता था, वही इस जीत के हीरो बन गए।

• उन्होंने साबित किया कि असफलता कभी स्थायी नहीं होती।

• आगरकर ने वनडे में भी शानदार प्रदर्शन किया था और सबसे तेज़ 50 वनडे विकेट लेने का रिकॉर्ड बनाया, जिसमें उन्होंने महान गेंदबाज़ डेनिस लिली को पीछे छोड़ा।

अजीत आगरकर की प्रेरणा: संघर्ष से सफलता तक

आगरकर की कहानी हर युवा खिलाड़ी और आम इंसान के लिए सीख है।

• आलोचना और असफलता जीवन का हिस्सा हैं।

• अगर आत्मविश्वास और मेहनत हो, तो वापसी हमेशा संभव है।

• उनका सफर बताता है कि कभी हार मत मानो, क्योंकि कल का दिन तुम्हारा हो सकता है।

निष्कर्ष

एडिलेड 2003 सिर्फ एक क्रिकेट मैच नहीं था, बल्कि भारतीय क्रिकेट की मानसिकता बदलने का पल था।

अजीत आगरकर ने उस दिन दिखा दिया कि “बॉम्बे डक” कहलाने वाला खिलाड़ी भी टीम इंडिया का असली नायक बन सकता है।

यह जीत आज भी भारतीय फैंस के दिल में जिंदा है और हर उस इंसान के लिए प्रेरणा है, जिसने कभी असफलताओं से जूझकर सफलता हासिल की।

FAQs

1. अजीत आगरकर को “बॉम्बे डक” क्यों कहा जाता था?

क्योंकि उन्होंने साल 2000 में लगातार 7 टेस्ट पारियों में शून्य (0) पर आउट होने का दुर्भाग्यपूर्ण रिकॉर्ड बनाया था।

2. एडिलेड टेस्ट 2003 में आगरकर का प्रदर्शन कैसा था?

उन्होंने दूसरी पारी में 6 विकेट लिए और ऑस्ट्रेलिया को 196 पर समेटने में अहम भूमिका निभाई।

3. एडिलेड टेस्ट जीत में सबसे बड़ा योगदान किसका था?

गेंदबाज़ी में अजीत आगरकर और बल्लेबाज़ी में राहुल द्रविड़ व वीवीएस लक्ष्मण के शानदार प्रदर्शन ने भारत को जीत दिलाई।

4. अजीत आगरकर का एक और बड़ा रिकॉर्ड क्या है?

उन्होंने सबसे तेज़ 50 वनडे विकेट लेने का रिकॉर्ड बनाया था, जिससे उन्होंने डेनिस लिली को पीछे छोड़ा।

5. एडिलेड टेस्ट की जीत भारत के लिए क्यों खास थी?

क्योंकि यह 20 साल बाद ऑस्ट्रेलिया की धरती पर भारत की पहली टेस्ट जीत थी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *