परमाणु बम: विज्ञान से विनाश तक का सफर
मानव सभ्यता ने विज्ञान और तकनीक की मदद से अपनी दुनिया को बेहतर बनाने के अनगिनत तरीके खोजे। लेकिन इसी विज्ञान ने हमें ऐसी ताकत भी दी, जो पल भर में पूरे शहर को मिटा सकती है… परमाणु बम (Atomic Bomb)।
हिरोशिमा और नागासाकी पर गिराए गए बम ने यह साबित कर दिया कि इंसान ने खुद अपने विनाश का रास्ता तैयार कर लिया है।
न्यूट्रॉन की खोज और लियो जिलार्ड का प्रस्ताव
12 सितंबर 1932 को, न्यूट्रॉन की खोज के केवल सात महीने बाद हंगरी के वैज्ञानिक लियो जिलार्ड ने यह विचार प्रस्तुत किया कि अगर किसी परमाणु पर तेज़ गति से न्यूट्रॉन दागा जाए, तो वह परमाणु को तोड़ सकता है।
क्योंकि न्यूट्रॉन पर कोई विद्युत आवेश (चार्ज) नहीं होता, इसलिए प्रोटॉन उसे रोक नहीं पाते। परिणामस्वरूप परमाणु विखंडन (Fission) की प्रक्रिया से दो हिस्सों में टूट जाता है और अपार ऊर्जा पैदा होती है।
यही सिद्धांत आगे चलकर एटॉमिक बम की नींव बना।
एटॉमिक बम का बेसिक सिद्धांत
• स्ट्रॉन्ग फोर्स इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फोर्स से 100 गुना ज्यादा ताकतवर होती है।
• लेकिन यह 100 से ज्यादा प्रोटॉनों वाले परमाणुओं को स्थिर नहीं रख पाती।
• यही वजह है कि यूरेनियम (Uranium) और प्लूटोनियम जैसे तत्व बेहद अस्थिर होते हैं।
जब यूरेनियम के परमाणु पर न्यूट्रॉन टकराया, तो वह टूटकर रूबिडियम और सीज़ियम जैसे छोटे परमाणुओं में बंट गया। इसके साथ ही तीन और न्यूट्रॉन निकले, जो दूसरे यूरेनियम परमाणुओं को तोड़ने लगे।
यही प्रक्रिया चेन रिएक्शन (Chain Reaction) कहलाती है, और यही परमाणु बम की असली ताकत है।
मैनहट्टन प्रोजेक्ट और पहला बम परीक्षण
1938–39 तक यह थ्योरी लैब में सफल हो चुकी थी। लेकिन खतरा यह था कि नाजी जर्मनी सबसे पहले बम न बना ले।
यही सोचकर अल्बर्ट आइंस्टीन समेत कई वैज्ञानिकों ने अमेरिकी राष्ट्रपति रूजवेल्ट को चिट्ठी लिखी। परिणामस्वरूप शुरू हुआ मैनहट्टन प्रोजेक्ट। इतिहास का सबसे बड़ा वैज्ञानिक प्रोजेक्ट।
1,30,000 वैज्ञानिकों और मजदूरों की कड़ी मेहनत के बाद, 16 जुलाई 1945 को अमेरिका ने ट्रिनिटी टेस्ट (Trinity Test) किया। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि परियोजना प्रमुख रॉबर्ट ओपनहाइमर ने भगवद्गीता का श्लोक दोहराया—
“अब मैं मृत्यु बन गया हूँ, संसारों का संहारक।”
हिरोशिमा और नागासाकी: इंसानियत पर पहला प्रहार
हिरोशिमा (6 अगस्त 1945)
• बम का नाम: लिटिल बॉय
• सामग्री: 64 किलो यूरेनियम
• वास्तविक विखंडन: मात्र 0.7 ग्राम
• विनाश: 90,000 लोग तत्काल मारे गए
सिर्फ आधे ग्राम से भी कम पदार्थ ने पूरा शहर खंडहर में बदल दिया।
नागासाकी (9 अगस्त 1945)
दूसरा बम फैट मैन असल में कुकूरा शहर पर गिरना था, लेकिन बादलों के कारण विमान रास्ता बदलकर नागासाकी पहुंचा।
• तत्काल मौतें: 80,000
• वर्ष के अंत तक दोनों शहरों में मौत का आंकड़ा: 3,40,000 से अधिक
जो बचे, वे विकिरणजनित कैंसर और असाध्य रोगों से पीड़ित हुए।
शीत युद्ध और न्यूक्लियर हथियारों की दौड़
दुनिया ने हिरोशिमा-नागासाकी से कुछ नहीं सीखा। बल्कि, यह घटनाएं न्यूक्लियर आर्म्स रेस की शुरुआत बनीं।
• अमेरिका ने बम बनाया तो रूस ने भी बनाया।
• फिर ब्रिटेन, फ्रांस और चीन ने।
• भारत ने परीक्षण किया तो पाकिस्तान ने भी।
आज केवल रूस और अमेरिका के पास ही मिलाकर 15,000 से ज्यादा परमाणु बम हैं। यह संख्या इतनी है कि वे पृथ्वी के हर बड़े शहर को नष्ट करके भी 10,000 बम बचा सकते हैं।
परमाणु हथियार: विज्ञान या मानवता की भूल?
विज्ञान ने हमें केवल साधन दिए हैं। जैसे माचिस की तीली घर को रोशन भी कर सकती है और जला भी सकती है।
जिम्मेदारी इंसानों पर है कि वे परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल बिजली उत्पादन, चिकित्सा और अंतरिक्ष अनुसंधान में करें या इसे विनाश का हथियार बनाएँ।
यदि एक और न्यूक्लियर युद्ध हुआ, तो यह सिद्ध हो जाएगा कि इंसान पृथ्वी की सबसे बुद्धिमान प्रजाति नहीं था। बल्कि गोरिल्ला, शेर और कीड़े-मकोड़े हमसे ज्यादा समझदार थे।
निष्कर्ष
परमाणु बम सिर्फ एक हथियार नहीं, बल्कि यह इंसानियत के सामने खड़ा सबसे बड़ा सवाल है—
क्या हम विज्ञान का इस्तेमाल जीवन को बेहतर बनाने के लिए करेंगे, या उसे अपनी बर्बादी का कारण बना देंगे?
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. परमाणु बम कैसे काम करता है?
परमाणु बम न्यूक्लियर फिशन (परमाणु विखंडन) पर आधारित है, जिसमें भारी तत्वों (यूरेनियम या प्लूटोनियम) के परमाणु टूटकर अपार ऊर्जा छोड़ते हैं।
Q2. हिरोशिमा पर गिराए गए बम से कितने लोग मरे थे?
लगभग 90,000 लोग तुरंत मारे गए, और वर्ष के अंत तक यह संख्या 1,40,000 से अधिक हो गई।
Q3. नागासाकी पर बम क्यों गिराया गया था?
जापान को मजबूरन आत्मसमर्पण करवाने और अमेरिका की शक्ति दिखाने के लिए। मूल टारगेट कुकूरा था, लेकिन मौसम खराब होने से नागासाकी चुना गया।
Q4. आज के परमाणु बम कितने शक्तिशाली हैं?
आज के हाइड्रोजन बम हिरोशिमा के बम से लाखों गुना ज्यादा शक्तिशाली हैं।
Q5. क्या परमाणु ऊर्जा का उपयोग शांति के लिए हो सकता है?
हाँ, परमाणु ऊर्जा का उपयोग बिजली उत्पादन, चिकित्सा और वैज्ञानिक शोध में शांति के लिए किया जा सकता है।
