बॉबी फिल्म की कहानी: राज कपूर का मास्टरपीस जिसने बदली हिंदी सिनेमा की परिभाषा

राज कपूर की फिल्म बॉबी (1973) की सफलता की कहानी, कास्टिंग, विवाद और रोचक किस्से। जानिए कैसे ऋषि कपूर-डिंपल कपाड़िया ने बनाया इतिहास।

प्रस्तावना: जब राज कपूर थे कर्ज़ में डूबे

हिंदी सिनेमा के शोमैन राज कपूर अपने करियर के कठिन दौर से गुजर रहे थे। 1970 में रिलीज़ हुई उनकी महत्वाकांक्षी फिल्म मेरा नाम जोकर बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह असफल रही थी। नतीजा यह हुआ कि राज कपूर गले तक कर्ज़ में डूब गए। परिवार की आर्थिक स्थिति डांवाडोल थी और उनके बड़े बेटे रणधीर कपूर की डेब्यू फिल्म कल आज और कल भी कोई खास कमाल नहीं दिखा सकी।

ऐसे में राज कपूर के पास सिर्फ एक ही रास्ता था… एक नई फिल्म बनाना। लेकिन इस बार फिल्म को हर हाल में हिट होना ही था।

आर्चीज़ कॉमिक्स से आया आइडिया

राज कपूर के दिमाग में एक अनोखी कहानी ने जन्म लिया। यह कहानी उन्हें कहीं और से नहीं बल्कि आर्चीज़ कॉमिक्स से मिली।

उन दिनों ऋषि कपूर आर्चीज़ कॉमिक्स पढ़ा करते थे। कभी-कभार राज कपूर भी उन्हें पढ़ लेते। कॉमिक्स में एक टीनएज लड़के और लड़की की मासूम प्रेमकथा थी। राज कपूर ने सोचा कि क्यों न इसी तरह की कहानी भारतीय परिवेश में बनाई जाए।

उन्होंने लेखक ख्वाजा अहमद अब्बास को यह विचार बताया और स्क्रीनप्ले तैयार करवाया। वी.पी. साठे ने इसमें सहयोग दिया और जैनेंद्र जैन ने डायलॉग्स लिखे।

बॉबी फिल्म का जन्म

राज कपूर ने फिल्म का नाम रखा बॉबी। यह जैनेंद्र जैन की भी पहली फिल्म थी।

अब बारी थी हीरो-हीरोइन चुनने की। उस दौर में फिल्म इंडस्ट्री के लगभग सभी स्टार हीरो 30–35 साल के थे। कोई भी टीनएज रोल में फिट नहीं बैठता था। ऐसे में राज कपूर ने अपने बेटे ऋषि कपूर को ही लॉन्च करने का फैसला किया।

डिंपल कपाड़िया बनीं ‘बॉबी’

फिल्म की हीरोइन के लिए ऑडिशन्स हुए। कई नाम आए, जिनमें नीतू सिंह भी शामिल थीं, लेकिन वो सिलेक्ट नहीं हुईं।

आखिरकार डिंपल कपाड़िया को चुना गया। उनकी मासूमियत और आकर्षण राज कपूर के विज़न के बिल्कुल अनुरूप थी।

कलाकारों का चयन और उनकी कहानियां

• ऋषि कपूर → हीरो, जिनकी डेब्यू फिल्म थी।

• डिंपल कपाड़िया → मात्र 16 साल की उम्र में सुपरस्टार बनीं।

• प्रेमनाथ → हीरोइन के पिता का किरदार, राज कपूर के साले।

• प्राण → हीरो के पिता का किरदार। उन्होंने सिर्फ ₹1 में फिल्म साइन की।

• अरुणा ईरानी → इस फिल्म ने उनके करियर को पुनर्जीवित किया।

• प्रेम चोपड़ा → गूंडे का रोल, उनका डायलॉग “प्रेम नाम है मेरा… प्रेम चोपड़ा” इतिहास बन गया।

प्राण और राज कपूर की दोस्ती का अंत

प्राण साहब इंडस्ट्री के सबसे महंगे कैरेक्टर आर्टिस्ट थे। राज कपूर ने उनसे कहा कि वो पूरी फीस नहीं दे पाएंगे।

प्राण ने मात्र ₹1 लेकर काम किया और वादा किया कि फिल्म हिट होने पर फीस लेंगे।

बॉबी हिट हुई, लेकिन जब राज कपूर ने उन्हें ₹3 लाख की जगह केवल ₹1 लाख दिए तो प्राण ने चेक लौटा दिया और दोनों की दोस्ती खत्म हो गई।

बॉबी का जादू और बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड

1973 में रिलीज़ हुई बॉबी ने इतिहास रच दिया।

• बजट: ₹25–40 लाख (विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार)

• कलेक्शन: ₹5.5 करोड़ (उस दौर के हिसाब से ब्लॉकबस्टर)

• 1973 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म

• दर्शकों में क्रेज इतना था कि गाँवों-कस्बों से लोगों को लाने के लिए स्पेशल बसें चलाई गईं।

फिल्मफेयर अवॉर्ड्स और विवाद

21वें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स (1974) में बॉबी ने पांच अवॉर्ड जीते—

1. बेस्ट एक्टर – ऋषि कपूर

2. बेस्ट एक्ट्रेस – डिंपल कपाड़िया (जया भादुरी के साथ टाई)

3. बेस्ट मेल प्लेबैक – नरेंद्र चंचल

4. बेस्ट आर्ट डायरेक्शन – ए. रंगराज

5. बेस्ट साउंड – अलाउद्दीन खान कुरैशी

लेकिन बाद में ऋषि कपूर ने खुलासा किया कि उन्होंने यह अवॉर्ड ₹30,000 देकर खरीदा था। इस बयान ने फिल्म अवॉर्ड्स की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए।

संगीत और यादगार गाने

लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के संगीत और आनंद बख्शी के बोलों ने फिल्म को अमर बना दिया।

“हम तुम एक कमरे में बंद हो” और “जिस देश में गंगा बहती है” जैसे गीत आज भी याद किए जाते हैं।

पर्दे के पीछे की कहानियां

• नीतू सिंह का असफल ऑडिशन → लेकिन बाद में वो ऋषि कपूर की जीवन संगिनी बनीं।

• अरुणा ईरानी की करियर की दूसरी पारी।

• प्रेम चोपड़ा का डायलॉग जिसने उन्हें अमर कर दिया।

बॉबी की सफलता का महत्व

• हिंदी सिनेमा में टीनएज रोमांस की शुरुआत।

• नए कलाकारों को लॉन्च करने का चलन मजबूत हुआ।

• भारतीय फिल्म उद्योग को आर्थिक मंदी से बाहर निकाला।

• राज कपूर को दोबारा ‘शोमैन’ की पहचान दिलाई।

निष्कर्ष

1973 की बॉबी सिर्फ एक फिल्म नहीं थी, यह हिंदी सिनेमा का टर्निंग पॉइंट थी।

राज कपूर ने साबित कर दिया कि बड़े स्टार्स के बिना भी एक मजबूत कहानी और विज़न फिल्म को सफल बना सकते हैं।

ऋषि कपूर और डिंपल कपाड़िया रातों-रात स्टार बन गए।

आज, 52 साल बाद भी बॉबी उतनी ही ताजगी और मासूमियत के साथ याद की जाती है जितनी उस दौर में थी।

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