27 अगस्त 2004 यह तारीख़ बॉलीवुड के इतिहास में हमेशा याद रखी जाएगी। इसी दिन रिलीज़ हुई थी धूम। वो फ़िल्म जिसने भारतीय सिनेमा को न सिर्फ़ नई पहचान दी, बल्कि देश के युवाओं की लाइफ़स्टाइल और चॉइस को भी बदल दिया। जॉन अब्राहम की सुज़ुकी हायाबूसा पर दौड़ लगाती हुई इमेज आज भी लोगों के दिमाग़ में ताज़ा है।
हालांकि शुरुआत में डायरेक्टर संजय गढ़वी ने सोचा था कि फिल्म में स्पोर्ट्स कारों का इस्तेमाल किया जाएगा। लेकिन उन्होंने अंदाज़ा लगाया कि कारों में बैठे एक्टर्स के चेहरे पर फोकस करना मुश्किल होगा। साथ ही, उन्हें खुद भी बाइक्स पसंद थीं। इसी वजह से धूम ने स्पोर्ट्स कार की बजाय स्पोर्ट्स बाइक्स को चुना और यही फैसला इस फ़िल्म की पहचान बन गया।
धूम की कहानी और बॉक्स ऑफिस का सफ़र
साल 2004 में धूम का बजट सिर्फ़ 11 करोड़ रुपए था। लेकिन इसने बॉक्स ऑफिस पर 31.6 करोड़ रुपए की नेट कमाई की। उस साल यह फिल्म वीर ज़ारा के बाद दूसरी सबसे बड़ी हिट रही।
• वीर ज़ारा (बजट: ₹23 करोड़, कमाई: ₹41.86 करोड़)
• धूम (बजट: ₹11 करोड़, कमाई: ₹31.6 करोड़)
इस फिल्म ने न सिर्फ़ प्रोड्यूसर्स को तगड़ा मुनाफ़ा दिलाया, बल्कि बॉलीवुड में स्टाइलिश एक्शन फिल्मों का नया ट्रेंड भी शुरू कर दिया।
अभिषेक बच्चन की पहली हिट
धूम का एक बड़ा सरप्राइज़ पैकेज रहे अभिषेक बच्चन। इससे पहले उनकी कोई भी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही थी। लेकिन धूम ने उनके करियर की दिशा बदल दी।
दिलचस्प बात यह है कि उसी दिन अभिषेक की एक और फिल्म फिर मिलेंगे भी रिलीज़ हुई थी। इस फिल्म में सलमान खान और शिल्पा शेट्टी जैसे सितारे थे, लेकिन यह फिल्म फ्लॉप रही। वहीं धूम ने अभिषेक को पहली बार असली स्टारडम का स्वाद चखाया।
जॉन अब्राहम और युवाओं का क्रेज़
अगर कहा जाए कि धूम ने जॉन अब्राहम को यूथ आइकन बना दिया, तो ग़लत नहीं होगा।
• उनकी हेयर स्टाइल कॉलेज गोइंग लड़कों के बीच ट्रेंड बन गई।
• कहा जाता है कि महेंद्र सिंह धोनी के लंबे बाल भी जॉन अब्राहम से इंस्पायर्ड थे।
• उनकी स्टाइलिश नेगेटिव भूमिका ने विलेन को भी एक ग्लैमरस टच दिया।
यह फिल्म अभिषेक और जॉन की पहली जोड़ी थी। बाद में दोनों दोस्ताना (2008) में भी साथ दिखाई दिए।
धूम और गानों का जादू
धूम सिर्फ़ एक्शन और बाइक्स तक सीमित नहीं रही। इसके गानों ने भी जबरदस्त धूम मचाई।
• धूम मचाले (सुनिधि चौहान)
• धूम धूम (टाटा यंग, थाई सिंगर)
ये गाने युवाओं के बीच नाइट क्लब्स और कॉलेज पार्टियों के एंथम बन गए। आज भी अगर पार्टी में धूम मचाले बज जाए, तो डांस फ्लोर पर एनर्जी दोगुनी हो जाती है।
सेंसरशिप और फैमिली एंटरटेनमेंट
कहा जाता है कि फिल्म में अभिषेक बच्चन और रिमी सेन के बीच एक बोल्ड सीन भी शूट किया गया था। लेकिन डायरेक्टर ने उसे हटाने का फैसला किया ताकि धूम को फैमिली ऑडियंस भी आराम से देख सके।
यह समझदारी का फैसला साबित हुआ। नतीजा यह हुआ कि धूम को हर उम्र के दर्शकों ने थिएटर में एंजॉय किया।
पर्दे के पीछे की दिलचस्प बातें
• शुरुआती कास्टिंग में संजय दत्त को साइन किया गया था, लेकिन डेट्स की समस्या के कारण वे फिल्म से बाहर हो गए।
• फिल्म का असली USP बनी स्पोर्ट्स बाइक्स। अगर इसमें कारें होतीं, तो शायद फिल्म इतनी यादगार नहीं बन पाती।
• धूम की सफलता ने आगे चलकर सीक्वेल्स की नींव रखी। धूम 2 (2006) और धूम 3 (2013)।
धूम का पॉप कल्चर पर असर
धूम के बाद भारतीय युवाओं के बीच स्पोर्ट्स बाइक्स, स्टाइलिश हेयरकट्स और वेस्टर्न लुक्स का क्रेज़ बढ़ा।
• बाइकिंग ग्रुप्स और स्ट्रीट रेसिंग कल्चर तेजी से लोकप्रिय हुआ।
• ब्रांड्स ने भी अपने विज्ञापनों में धूम स्टाइल मार्केटिंग का इस्तेमाल किया।
• यशराज फिल्म्स ने यह साबित कर दिया कि भारतीय दर्शक भी हॉलीवुड-स्टाइल एक्शन को हाथोंहाथ लेंगे।
21 साल बाद भी क्यों याद है धूम?
आज जब धूम को रिलीज़ हुए 21 साल पूरे हो गए हैं, तब भी इसका असर कम नहीं हुआ।
• यह फिल्म भारतीय एक्शन सिनेमा के लिए मील का पत्थर साबित हुई।
• इसने दिखाया कि स्टाइल और कंटेंट साथ-साथ चल सकते हैं।
• युवाओं के लिए यह सिर्फ़ एक फिल्म नहीं, बल्कि स्टाइल स्टेटमेंट थी।
निष्कर्ष
धूम सिर्फ़ एक फिल्म नहीं थी, बल्कि एक कल्चरल फेनॉमेनन थी। इसने स्पोर्ट्स बाइक्स को भारत के युवाओं के सपनों में शामिल कर दिया। अभिषेक बच्चन को स्टार बनाया, जॉन अब्राहम को स्टाइल आइकन, और बॉलीवुड को एक नई एक्शन फ्रैंचाइज़ी दी।
आज भी अगर धूम मचाले गाना बजता है या कोई युवा स्पोर्ट्स बाइक पर रोड पर निकलता है, तो कहीं-न-कहीं उसके पीछे धूम का ही जादू है।
