ग्रेटर इजरायल और अखंड भारत के विचार पर विश्लेषण, चुनौतियों, अवसरों और भविष्य के सभ्यतागत संघर्ष का गहन अध्ययन।
परिचय
इतिहास गवाह है कि सभ्यताएँ धर्म से बड़ी होती हैं, और जब सभ्यतागत संघर्ष सामने आता है तो उसका असर सैकड़ों वर्षों तक दिखाई देता है।
आज जिस तरह से इजरायल ने “ग्रेटर इजरायल” का नक्शा प्रस्तुत किया, उसी तरह भारत में भी “अखंड भारत” की धारणा लंबे समय से चर्चा में है।
दोनों विचार केवल राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं बल्कि ऐतिहासिक स्मृति और सभ्यतागत चेतना का परिणाम हैं।
यह लेख इसी तुलना पर केंद्रित है… ग्रेटर इजरायल और अखंड भारत के सपनों, चुनौतियों और संभावनाओं का विश्लेषण।
ग्रेटर इजरायल की अवधारणा
• उत्पत्ति: 1948 में इजरायल के गठन के समय से ही यह विचार उभरा कि यहूदियों की प्राचीन भूमि को एक दिन पुनः स्थापित किया जाएगा।
• भूगोल: इस विचार के अनुसार इजरायल की सीमाएँ मिडिल ईस्ट के कई हिस्सों तक फैली हो सकती हैं।
• हालिया दावा: बताया गया है कि इजरायल ने ईरान के खोरासन पर्वत तक क्षेत्र को अपने मानचित्र में शामिल किया है।
यह स्पष्ट है कि इजरायल अभी तुरंत इन क्षेत्रों पर दावा करने नहीं जा रहा। यह एक दीर्घकालिक विज़न है, जो संभवतः आने वाले 100–200 वर्षों में ही आकार ले सकेगा।
अखंड भारत का विचार
• ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: अखंड भारत का सपना किसी राजनीतिक पार्टी या संगठन का आविष्कार नहीं है, बल्कि यह प्राचीन भारतीय सभ्यता की निरंतरता की भावना है।
• भौगोलिक दायरा: इसमें भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका, अफगानिस्तान और ईरान का पूर्वी भाग शामिल माना जाता है।
• आधुनिक संदर्भ: भारत में यह विचार आज भी चर्चित है, खासकर जब लोग इतिहास और सांस्कृतिक पहचान की ओर लौटते हैं।
इजरायल और भारत: समानताएँ और भिन्नताएँ
1. सभ्यतागत संघर्ष
दोनों ही राष्ट्र (भारत और इजरायल) खुद को केवल धर्म के आधार पर परिभाषित नहीं करते, बल्कि वे स्वयं को सभ्यता के रूप में देखते हैं।
• यहूदियों की सभ्यता ने हज़ारों वर्षों तक संघर्ष किया और होलोकॉस्ट जैसी त्रासदी झेली।
• हिन्दू सभ्यता ने भी आक्रमणों, विभाजन और सांप्रदायिक संघर्षों के बावजूद अपनी पहचान बचाए रखी।
2. जनसंख्या चुनौती
• इजरायल की चिंता मुस्लिम बहुल क्षेत्रों से है।
• भारत को भी मुस्लिम जनसंख्या वृद्धि और जनसांख्यिकीय असंतुलन की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
3. विश्व राजनीति
• इजरायल को अमेरिका का समर्थन है, लेकिन यूरोप और संयुक्त राष्ट्र के कई देश फिलिस्तीन को मान्यता देने की तैयारी में हैं।
• भारत को चीन और पाकिस्तान से रणनीतिक चुनौतियाँ मिलती हैं, लेकिन वैश्विक राजनीति में भारत की छवि “शांतिप्रिय सभ्यता” की है।
100 साल का वर्ल्ड ऑर्डर: क्यों है यह महत्वपूर्ण?
इतिहास बताता है कि हर 100 साल में विश्व व्यवस्था बदलती है।
• 1925 में मिडिल ईस्ट के कई देश अस्तित्व में ही नहीं थे।
• 1945 तक यहूदी लगभग समाप्ति के कगार पर पहुँच गए थे।
• 2014 तक भारत भी आंतरिक विभाजन और अस्थिरता का शिकार था।
लेकिन दोनों ही सभ्यताओं ने बाउंस बैक किया और अब वे आक्रामक और आत्मविश्वासी बनकर उभरे हैं।
मुस्लिम जनसंख्या: साझा चुनौती
एक बड़ा सवाल यह है कि यदि अखंड भारत और ग्रेटर इजरायल की अवधारणा एक साथ आगे बढ़ती है, तो बढ़ती मुस्लिम जनसंख्या का क्या होगा?
• केवल भारत और इजरायल ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को इस चुनौती से निपटना होगा।
• यह संघर्ष केवल धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक और जनसंख्या-आधारित टकराव है।
सभ्यता बनाम मज़हब
लेखक का तर्क बिल्कुल सही है कि सभ्यता हमेशा मज़हब से बड़ी होती है।
• मज़हब भावनाओं और मान्यताओं पर आधारित होता है।
• सभ्यता अनुभव, ज्ञान, संस्कृति और विकास की निरंतरता का नाम है।
यही कारण है कि यहूदी और हिन्दू सभ्यताएँ बार-बार टूटने के बाद भी पुनर्जीवित हुईं और आज भी मजबूती से खड़ी हैं।
वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य
• सितंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीन को मान्यता देने की कोशिशें बढ़ने वाली हैं।
• ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा जैसे देश फिलिस्तीन के समर्थन में खड़े हो सकते हैं।
• ऐसे में इजरायल पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ेगा।
भारत को भी इस घटनाक्रम पर नज़र रखनी होगी क्योंकि इससे मध्य पूर्व की राजनीति बदल सकती है, जिसका सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और सामरिक हितों पर पड़ेगा।
निष्कर्ष
ग्रेटर इजरायल और अखंड भारत मात्र राजनीतिक विचार नहीं हैं, बल्कि सभ्यताओं की दीर्घकालिक स्मृति और संघर्ष का प्रतीक हैं।
दोनों की समान चुनौतियाँ हैं… मुस्लिम जनसंख्या विस्फोट, अंतरराष्ट्रीय राजनीति का दबाव और विश्व व्यवस्था का बदलता स्वरूप।
लेकिन दोनों का साझा विश्वास यही है कि सभ्यता की विजय अंततः निश्चित है।
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FAQ सेक्शन
Q1: ग्रेटर इजरायल की अवधारणा क्या है?
उत्तर: यहूदियों की ऐतिहासिक भूमि को पुनः स्थापित करने का विचार, जिसमें इजरायल की सीमाएँ मिडिल ईस्ट के कई हिस्सों तक बढ़ाने की बात शामिल है।
Q2: अखंड भारत का मानचित्र किन क्षेत्रों को शामिल करता है?
उत्तर: भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका, अफगानिस्तान और ईरान का पूर्वी हिस्सा अखंड भारत के मानचित्र का हिस्सा माना जाता है।
Q3: इजरायल और भारत की सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
उत्तर: दोनों को ही बढ़ती मुस्लिम जनसंख्या और सांस्कृतिक संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है।
Q4: क्या वर्ल्ड ऑर्डर वास्तव में हर 100 साल में बदलता है?
उत्तर: इतिहास के उदाहरण बताते हैं कि लगभग हर शताब्दी में वैश्विक राजनीति और सीमाएँ नए रूप में ढल जाती हैं।
Q5: क्या ग्रेटर इजरायल और अखंड भारत वास्तव में संभव हैं?
उत्तर: निकट भविष्य में नहीं, लेकिन दीर्घकाल में यह दोनों विचार सभ्यताओं की स्मृति और संघर्ष के कारण ज़िंदा रहेंगे।
