इज़राइल-तुर्की टकराव की आशंका: क्या अंकारा बनेगा अगला निशाना?

इज़राइल-तुर्की टकराव पर बढ़ता तनाव। क्या इज़राइल तुर्की पर एयर स्ट्राइक कर सकता है? जानिए मिडिल ईस्ट की मौजूदा स्थिति और इसके वैश्विक असर।

प्रस्तावना: मिडिल ईस्ट की बदलती तस्वीर

मध्य-पूर्व (Middle East) हमेशा से दुनिया की राजनीति, धर्म और ऊर्जा संसाधनों का केंद्र रहा है। यह इलाका न सिर्फ़ एशिया बल्कि यूरोप और अफ्रीका तक फैला हुआ है। दुनिया के लगभग 50% तेल का उत्पादन यहीं से होता है, यही कारण है कि यह क्षेत्र लगातार संघर्ष, युद्ध और कूटनीतिक खींचतान का गवाह बनता आया है।

फिलहाल, सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इज़राइल जल्द ही तुर्की पर एयर स्ट्राइक कर सकता है? क़तर की राजधानी दोहा पर हमले के बाद यह आशंका और गहराती जा रही है।

इज़राइल की आक्रामक रणनीति और तुर्की का डर

इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में यह स्पष्ट किया था कि “आतंकवादी चाहे कहीं भी हों, इज़राइल उन्हें मारने जाएगा।” इस बयान के बाद तुर्की की राजधानी अंकारा में डर और अनिश्चितता का माहौल है।

हमास की नेतृत्वकारी टीम के कई सदस्य तुर्की में छिपे होने की खबरें पहले से हैं, खासकर साइबर डिवीजन से जुड़े नेता। इज़राइल ने कई बार इन पर निशाना साधने की बात की है। सवाल यह है कि क्या अब तुर्की इज़राइल का अगला लक्ष्य होगा?

ऐतिहासिक संदर्भ: म्यूनिख ओलंपिक और मोसाद की कार्रवाई

1972 के म्यूनिख ओलंपिक हमले के बाद मोसाद ने दुनिया भर में जाकर आतंकवादियों को खत्म किया था। नेतन्याहू ने हाल ही में अमेरिकी नेता मार्को रूबियो के साथ खड़े होकर वही उदाहरण दोहराया। उनका कहना था कि अगर किसी देश को यह तक पता न हो कि उसकी धरती पर आतंकवादी मौजूद हैं, तो यह उस देश को बचाने का बहाना नहीं बन सकता।

यानी इज़राइल अब किसी भी सीमा का सम्मान किए बिना आतंकवादियों को खत्म करने के लिए तैयार है।

तुर्की की कमजोर सैन्य स्थिति

यह सच है कि तुर्की NATO का सदस्य है, लेकिन उसकी सैन्य क्षमता सीमित है।

• तुर्की की वायुसेना के पास मुख्यतः F-16 लड़ाकू विमान हैं।

• उसके पास पुराने F-4 जेट भी हैं, जो आधुनिक युद्ध में अप्रभावी माने जाते हैं।

• पांचवीं पीढ़ी के विमान या आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम तुर्की के पास नहीं है।

इसके उलट इज़राइल के पास आधुनिक F-35 स्टील्थ जेट और मजबूत एयर डिफेंस है। यानी सीधी टक्कर की स्थिति में तुर्की की स्थिति कमजोर मानी जा रही है।

NATO की भूमिका: आर्टिकल 4 या आर्टिकल 5?

तुर्की NATO सदस्य है। सैद्धांतिक रूप से अगर उस पर हमला होता है, तो NATO के आर्टिकल 5 के तहत सभी सदस्य देशों को रक्षा करनी चाहिए। लेकिन वास्तविकता अलग है।

• तुर्की निश्चित रूप से आर्टिकल 4 के तहत आपात बैठक बुला सकता है।

• मगर अमेरिका पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि उसका सबसे करीबी सहयोगी इज़राइल है।

• ऐसे हालात में NATO सीधे इज़राइल के खिलाफ कदम उठाने की संभावना बेहद कम है।

OIC और इस्लामिक देशों की प्रतिक्रिया

तुर्की अकेला नहीं है। उसके साथ इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के कई देश हैं। सवाल यह है कि क्या OIC एकजुट होकर इज़राइल के खिलाफ कड़ा कदम उठाएगा?

अब तक इज़राइल ने फ़िलिस्तीन, लेबनान, सीरिया, यमन, ईरान और क़तर जैसे देशों पर कार्रवाई की है। तुर्की सातवां देश बन सकता है। लेकिन मुस्लिम दुनिया में राजनीतिक विभाजन इतना गहरा है कि किसी ठोस सामूहिक प्रतिक्रिया की संभावना कमजोर दिखाई देती है।

आर्थिक और कूटनीतिक दबाव

तुर्की पहले ही आर्थिक संकट से जूझ रहा है। लगातार हाई अलर्ट मोड पर रहना महंगा साबित होगा। इज़राइल यही इंतज़ार कर सकता है कि तुर्की सतर्कता में ढील दे, तभी हमला किया जाए।

कूटनीतिक मोर्चे पर भी तुर्की की स्थिति कठिन है। यूरोपीय संघ से उसके रिश्ते कमजोर हैं और अमेरिका से तनाव पहले से है। इज़राइल इन हालातों का फायदा उठा सकता है।

पाकिस्तान का नाम क्यों आ रहा है?

विश्लेषक मानते हैं कि अगर इज़राइल की यह आक्रामक नीति जारी रही, तो भविष्य में पाकिस्तान भी उसके दायरे में आ सकता है। पाकिस्तान में आतंकवादी नेटवर्क की मौजूदगी किसी से छिपी नहीं है। अगर इज़राइल को ठोस सबूत मिले, तो वह वहां भी हमला कर सकता है।

वैश्विक राजनीति पर असर

तुर्की पर हमला सिर्फ़ दो देशों के बीच संघर्ष नहीं होगा। इसके वैश्विक असर होंगे:

1. तेल और गैस बाजार पर झटका – मिडिल ईस्ट में नया युद्ध कीमतों को आसमान पर पहुंचा सकता है।

2. अमेरिका और रूस की भूमिका – दोनों महाशक्तियां अलग-अलग पक्ष ले सकती हैं।

3. भारत और एशिया पर असर – भारत जैसे देश, जो ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं, सीधे प्रभावित होंगे।

निष्कर्ष: भविष्य अनिश्चित लेकिन टकराव तय

तुर्की और इज़राइल के बीच तनाव जिस स्तर तक पहुंच चुका है, उससे टकराव लगभग तय लगता है। सवाल सिर्फ़ समय का है। क्या इज़राइल तुर्की पर सीधा एयर स्ट्राइक करेगा, या फिर कूटनीतिक दबाव और आर्थिक संकट तुर्की को झुका देगा?

मिडिल ईस्ट का भू-राजनीतिक परिदृश्य आने वाले महीनों में पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय रहेगा।

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