प्रस्तावना: भारतीय विज्ञापन जगत का सुनहरा अध्याय
भारतीय टेलीविज़न पर 1980 के दशक में कई ऐसे विज्ञापन बने जिन्होंने दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। लेकिन उनमें से सबसे यादगार रहा 1986 का पान पराग विज्ञापन, जिसमें दिग्गज अभिनेता अशोक कुमार और शम्मी कपूर एक साथ नज़र आए। यह सिर्फ एक पान मसाला का विज्ञापन नहीं था, बल्कि उस समय की सामाजिक परिस्थिति, पारिवारिक मूल्यों और फिल्मी सितारों के ग्लैमर का अनोखा संगम था।
आइडिया कैसे जन्मा: मनसुखभाई कोठारी का सुझाव
इस विज्ञापन का विचार सीधे पान पराग ब्रांड के मालिक मनसुखभाई कोठारी से आया। एक दिन उन्होंने एवरेस्ट एडवर्टाइजिंग कंपनी के फिल्म हेड दीपक शर्मा को चाय पर बुलाया। बातचीत के दौरान उन्होंने खुद एक्ट करके यह लाइन बोली –
“बारातियों का स्वागत पान पराग से करेंगे।”
यही वह क्षण था जब इस विज्ञापन की नींव रखी गई। कोठारी साहब चाहते थे कि विज्ञापन में शादी का माहौल दिखे, दहेज की समस्या पर हल्का-सा व्यंग्य किया जाए और परिवारिक संस्कृति को प्रमुखता दी जाए।
स्क्रिप्ट और क्रिएटिव टीम
मनसुखभाई का सुझाव तय होने के बाद कॉपीराइटर सुलेखा बाजपेयी करकरे को जिम्मेदारी दी गई कि वह इस विचार को पूरी स्क्रिप्ट का रूप दें। उन्होंने शादी की पृष्ठभूमि पर आधारित एक छोटा लेकिन असरदार स्क्रीनप्ले तैयार किया।
निर्माण का जिम्मा सिनेविस्टा कंपनी को सौंपा गया, जिसे सुनील मेहता और प्रेम कृष्ण ने मिलकर स्थापित किया था। शूटिंग के लिए क्रिएटिव टीम तैयार थी, बस अब जरूरत थी बड़े चेहरों की जो इस विज्ञापन को ऐतिहासिक बना दें।
शम्मी कपूर और अशोक कुमार का चयन
उस दौर में बड़े फिल्मी सितारे विज्ञापनों में काम करने से हिचकते थे। लेकिन रिश्तों और दोस्ती की बदौलत यह संभव हो पाया। प्रेम कृष्ण ने जब अपने रिश्तेदार शम्मी कपूर को ऑफर दिया, तो पहले उन्होंने कहा – “मैं एड-वैड नहीं करता।” लेकिन तुरंत ही जोड़ दिया – “तेरे लिए कर दूंगा।” इस तरह शम्मी कपूर राज़ी हो गए।
इसके बाद बारी आई अशोक कुमार (दादामुनि) की। वह भी ऐसे विज्ञापनों से दूरी बनाए रखते थे, लेकिन प्रेम कृष्ण के पिता और उनके घनिष्ठ मित्र प्रेमनाथ का नाम सुनकर वह झिझकते हुए मान गए। उन्होंने कहा – “बेटा, मैं ये सब करता तो नहीं हूं, मगर तुम्हारे लिए कर दूंगा।” इस तरह दो दिग्गज कलाकार इस विज्ञापन का हिस्सा बने।
शूटिंग और तकनीकी टीम
विज्ञापन की शूटिंग बेहद शानदार ढंग से की गई।
• डायरेक्टर ऑफ फोटोग्राफी: अशोक मेहता
• संगीत: अजीत सिंह
दिलचस्प बात यह रही कि इस विज्ञापन में अशोक कुमार और शम्मी कपूर की आवाज़ें इस्तेमाल नहीं की गईं। उनके डायलॉग्स को डबिंग आर्टिस्ट्स ने रिकॉर्ड किया। इसकी वजह आज तक स्पष्ट नहीं है, लेकिन इससे विज्ञापन की लोकप्रियता पर कोई असर नहीं पड़ा।
30 सेकेंड का मास्टरपीस
विज्ञापन की कहानी बेहद सरल लेकिन असरदार थी। शादी की तैयारियों में व्यस्त अशोक कुमार और उनकी पत्नी तनाव में हैं कि कहीं लड़के वाले कोई अप्रत्याशित मांग न कर दें। तभी शम्मी कपूर प्रवेश करते हैं और कहते हैं, “बारात ठीक आठ बजे पहुंचेगी, पर हम आपसे एक बात कहना भूल गए…” यह सुनकर सभी हैरान और चिंतित हो जाते हैं।
तनाव के बीच शम्मी कपूर मुस्कुराते हुए कहते हैं, “घबराइए नहीं, हमें कुछ नहीं चाहिए। बस इतना चाहते हैं कि बारातियों का स्वागत पान पराग से कीजिए।” यह सुनते ही अशोक कुमार और उनकी पत्नी राहत की सांस लेते हैं। अशोक कुमार अपनी जेब से पान पराग का डिब्बा निकालकर शम्मी कपूर को थमा देते हैं। और फिर गूंजती आवाज आती है – “पान पराग, पान मसाला, पान पराग।”
लोकप्रियता और प्रभाव
जैसे ही यह विज्ञापन दूरदर्शन पर प्रसारित हुआ, यह रातों-रात चर्चा का विषय बन गया। “बारातियों का स्वागत पान पराग से करेंगे” डायलॉग शादी-ब्याह में हंसी-मजाक का हिस्सा बन गया। उस समय दर्शक विज्ञापनों को भी मनोरंजन की तरह देखते थे और इस विज्ञापन ने उन्हें बिल्कुल निराश नहीं किया।
यह विज्ञापन भारतीय विज्ञापन उद्योग के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। इसके बाद कई बड़े सितारे टीवी विज्ञापनों में काम करने लगे।
राज कपूर की नाराज़गी
हालांकि यह विज्ञापन जितना लोकप्रिय हुआ, उतना ही विवादित भी बना। मशहूर किस्सा है कि जब शम्मी कपूर, राज कपूर, ऋषि कपूर, रणधीर कपूर और अन्य सितारे हॉन्ग कॉन्ग एयरपोर्ट पर थे, तो वहां मौजूद भारतीय मूल के लोग जोर-जोर से चिल्लाने लगे – “पान पराग! पान पराग!”
यह सुनकर राज कपूर को गुस्सा आ गया। उन्होंने शम्मी कपूर को अलग ले जाकर कहा –
“तुमने सारी जिंदगी मेहनत की, इतनी अच्छी फिल्में कीं, नाम कमाया और अवॉर्ड जीते। और आज लोग तुम्हें किस नाम से जानते हैं? पान पराग! तुम्हें शर्म नहीं आती?”
राज कपूर को यह अच्छा नहीं लगा कि उनके भाई की पहचान एक पान मसाला ब्रांड से जुड़ रही है।
शम्मी कपूर का नजरिया
शम्मी कपूर का दृष्टिकोण बिल्कुल अलग था। वह बचपन से अशोक कुमार के बहुत बड़े प्रशंसक थे और हमेशा चाहते थे कि उन्हें दादामुनि के साथ स्क्रीन शेयर करने का मौका मिले। फिल्मों में ऐसा कभी संभव नहीं हो सका। यहां तक कि कमाल अमरोही की फिल्म मजनूं में दोनों को कास्ट किया गया था, लेकिन फिल्म कभी रिलीज़ नहीं हुई।
जब पान पराग विज्ञापन का ऑफर आया और साथ में अशोक कुमार का नाम जुड़ा, तो शम्मी कपूर ने इसे एक सपने के पूरे होने जैसा माना। उनके लिए यह विज्ञापन कोई “कैरियर डाउनग्रेड” नहीं बल्कि “व्यक्तिगत उपलब्धि” था।
भारतीय विज्ञापन जगत पर असर
पान पराग विज्ञापन ने एडवरटाइजिंग इंडस्ट्री को नई दिशा दी। इसके बाद बड़े फिल्मी सितारे भी विज्ञापनों में काम करने लगे। ब्रांड्स ने समझा कि अगर उनके प्रोडक्ट्स को फिल्मी हस्तियों से जोड़ा जाए तो वह दर्शकों तक भावनात्मक जुड़ाव के साथ पहुंचेंगे।
यह विज्ञापन यह भी साबित करता है कि जब क्रिएटिविटी, समाजिक सन्देश और स्टार पावर एक साथ आते हैं, तो 30 सेकेंड का कंटेंट भी इतिहास बना सकता है।
निष्कर्ष
1986 का पान पराग विज्ञापन सिर्फ एक पान मसाला का प्रमोशन नहीं था, बल्कि भारतीय टेलीविज़न विज्ञापन जगत का स्वर्णिम अध्याय था। इसने एक ओर ब्रांड को अमर बना दिया, वहीं दूसरी ओर बड़े फिल्मी सितारों को विज्ञापन जगत से जोड़ने का रास्ता खोल दिया।
भले ही राज कपूर को यह विज्ञापन कभी पसंद नहीं आया और उन्होंने शम्मी कपूर को डांट भी लगाई, लेकिन दर्शकों ने इसे दिल से अपनाया। आज भी जब कोई कहता है – “बारातियों का स्वागत पान पराग से करेंगे”, तो चेहरे पर मुस्कान आ जाती है और हमें उस दौर की याद दिलाती है जब विज्ञापन भी कहानियां सुनाते थे।
