प्रस्तावना: SCO बैठक और भारत की भूमिका
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की 2025 की बैठक ने वैश्विक राजनीति का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस बैठक में दुनिया के चार सबसे ताक़तवर नेताओं में से तीन चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक साथ मंच साझा करेंगे। “द वाल स्ट्रीट जर्नल” की रिपोर्ट के मुताबिक यह मुलाकात केवल क्षेत्रीय सुरक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह भारत की बढ़ती वैश्विक पहचान और कूटनीतिक संतुलन का भी प्रतीक है।
मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग की मुलाकात का महत्व
SCO समिट: एशिया से यूरोप तक असर
SCO बैठक हमेशा से एशिया की सुरक्षा, व्यापार और राजनीतिक तालमेल का बड़ा मंच रही है। लेकिन इस बार स्थिति और भी संवेदनशील है क्योंकि रूस-यूक्रेन युद्ध अपने निर्णायक मोड़ पर है और चीन लगातार वैश्विक शक्ति संतुलन में बड़ी भूमिका निभाना चाहता है।
भारत की उपस्थिति इस समिट में और भी अहम हो जाती है क्योंकि:
• भारत रूस का ऊर्जा साझेदार है।
• भारत चीन के साथ सीमा विवाद के बावजूद आर्थिक और कूटनीतिक रिश्ते मजबूत कर रहा है।
• भारत अमेरिका और यूरोप के लिए भी एक रणनीतिक संतुलनकारी शक्ति बन चुका है।
ज़ेलेंस्की का मोदी से संवाद और उम्मीदें
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने ट्वीट कर बताया कि उनकी मोदी जी से लंबी बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि:
• अमेरिका (वॉशिंगटन) युद्ध को रोकने की कोशिश कर रहा है।
• रूस लगातार निर्दोष यूक्रेनी नागरिकों को मार रहा है।
• उन्होंने मोदी जी से आग्रह किया कि वे चीन में होने वाली SCO बैठक में यूक्रेन का पक्ष उठाएं और शांति का रास्ता निकालने में मदद करें।
यह तथ्य इस बात को रेखांकित करता है कि आज भारत सिर्फ दर्शक नहीं बल्कि सक्रिय मध्यस्थ के रूप में देखा जा रहा है।
ट्रम्प का बयान और भारतीय प्रतिक्रिया
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सलाहकार पीटर नोवरो ने मोदी जी की भगवा वस्त्र में ध्यान मुद्रा की तस्वीर शेयर कर लिखा—“यह रूस-यूक्रेन युद्ध नहीं, बल्कि मोदी का युद्ध है।”
हालांकि यह बयान भारत को नीचा दिखाने की कोशिश था, लेकिन सोशल मीडिया पर इसका उल्टा असर हुआ। हजारों भारतीय नागरिकों ने इस तस्वीर पर गर्व से भरे कमेंट किए और हिंदू आइडेंटिटी को सम्मान का प्रतीक बताया।
यह घटना दिखाती है कि आज भारत की छवि केवल कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि संस्कृति और पहचान भी उसकी शक्ति का हिस्सा बन चुकी है।
भारत की ऊर्जा कूटनीति: रूस से तेल, यूक्रेन को डीजल
एक और अहम तथ्य यह है कि भारत न केवल रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है, बल्कि उसे रिफाइन करके यूक्रेन को डीजल बेच रहा है।
• भारत फिलहाल यूक्रेन के कुल डीजल आयात का लगभग 15% अकेले आपूर्ति कर रहा है।
• यह स्थिति दर्शाती है कि भारत एक ऊर्जा हब के रूप में उभर रहा है।
यह कदम भारत की व्यावहारिक कूटनीति (Pragmatic Diplomacy) का बड़ा उदाहरण है। जहां वह रूस और यूक्रेन, दोनों से संबंध बनाए हुए है।
ट्रम्प और मोदी: निजी रिश्तों में तनाव
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जब ट्रम्प ने कनाडा से लौटने के बाद मोदी को फ़ोन किया तो उन्होंने कई बार इस बात का ज़िक्र किया कि पाकिस्तानी आर्मी चीफ़ आसिम मुनीर ने उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया है।
लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने इस विषय पर जानबूझकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
• इसका असर यह हुआ कि ट्रम्प और मोदी के निजी रिश्ते तनावपूर्ण हो गए।
• इससे यह भी स्पष्ट होता है कि भारत अब व्यक्तिगत संबंधों पर नहीं, बल्कि ठोस राष्ट्रीय हितों पर आधारित नीति चला रहा है।
चीन और भारत: सीमा विवाद से आगे बढ़ते रिश्ते
यूरोपीय मीडिया ने खुलासा किया कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखा था।
• इसमें कहा गया था कि चीन पुरानी बातों को भुलाकर आगे बढ़ना चाहता है।
• सीमा विवाद को स्थायी समाधान की दिशा में समाप्त करने का प्रस्ताव रखा गया।
भारत ने शुरू में चुप्पी साधी लेकिन जब अमेरिका ने दबाव बढ़ाया, तब राष्ट्रपति महोदया ने चीन को उत्तर दिया। इसके बाद चीनी प्रधानमंत्री की यात्रा हुई और दोनों देशों ने तय किया कि—
• असहमति को विवाद में न बदलें।
• प्रतियोगिता को दुश्मनी में न बदलें।
इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी की चीन यात्रा की योजना बनी, जिसने रिश्तों में नया अध्याय जोड़ा।
भारत की “रीढ़ सीधी” नीति और ग्लोबल पहचान
जब कोई राष्ट्र अपनी रीढ़ सीधी रखता है तो उसे कीमत चुकानी पड़ती है। लेकिन यही सीधी रीढ़ उसे एक अद्वितीय पहचान देती है।
आज भारत:
• रूस और पश्चिमी देशों के बीच संतुलन बना रहा है।
• चीन के साथ प्रतिस्पर्धा और सहयोग दोनों को संतुलित कर रहा है।
• ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला का बड़ा केंद्र बन चुका है।
• वैश्विक मंच पर शांति और मध्यस्थता की आवाज़ बनकर उभर रहा है।
निष्कर्ष: भारत एक ग्लोबल प्लेयर
SCO समिट 2025 की चर्चा इस बात को प्रमाणित करती है कि भारत अब ग्लोबल प्लेयर बन चुका है।
• चाहे रूस-यूक्रेन युद्ध हो,
• चीन के साथ संबंधों की जटिलता हो,
• या अमेरिका और यूरोप का दबाव
भारत हर मोर्चे पर कूटनीतिक संतुलन और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।
आने वाले समय में यह संतुलन ही भारत की सबसे बड़ी ताकत बनेगा और उसकी वैश्विक नेतृत्व क्षमता को और मजबूत करेगा।
