टूटा गाबा का घमंड – 2021 ब्रिसबेन टेस्ट में भारतीय क्रिकेट टीम की ऐतिहासिक जीत की पूरी कहानी, साहस, संघर्ष और जज़्बे की मिसाल।
प्रस्तावना: जब 36 रन से शुरू हुआ सपना
2020 की सर्दियों में दुनिया महामारी से जूझ रही थी। क्रिकेट मैदान भी वीरता और संघर्ष की गवाही बनने को तैयार था। भारतीय क्रिकेट टीम ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर थी। चार टेस्ट मैचों की सीरीज़ का पहला मुकाबला एडिलेड में हुआ, जहां भारत दूसरी पारी में सिर्फ 36 रन पर सिमट गया। यह भारत के टेस्ट क्रिकेट इतिहास का सबसे छोटा स्कोर था।
इस शर्मनाक हार के बाद आलोचना का तूफ़ान खड़ा हो गया। पूर्व खिलाड़ियों और क्रिकेट पंडितों ने भविष्यवाणी कर दी कि अब भारत सीरीज़ में बुरी तरह हार जाएगा। माइकल वॉन ने कहा – “ऑस्ट्रेलिया भारत का क्लीन स्वीप करेगा।” वहीं शोएब अख़्तर और जावेद मियांदाद जैसे दिग्गजों ने भी भारत की हार पर तंज कसा।
लेकिन जिस टीम को हर कोई टूटा हुआ मान रहा था, उसने आने वाले दिनों में ऐसा इतिहास रचा, जिसे दुनिया हमेशा याद रखेगी।
मेलबर्न टेस्ट: रहाणे की कप्तानी में वापसी
दूसरा टेस्ट मेलबर्न (MCG) में खेला गया। विराट कोहली भारत लौट चुके थे, और अब कप्तानी की बागडोर अजिंक्य रहाणे के हाथों में थी। रहाणे ने शानदार शतक जमाकर टीम को संभाला और भारतीय गेंदबाजों ने ऑस्ट्रेलिया को बैकफुट पर धकेल दिया।
भारत ने यह मैच 8 विकेट से जीता और आलोचकों को करारा जवाब दिया। यह सिर्फ जीत नहीं थी, बल्कि यह संदेश था कि भारतीय टीम टूटी नहीं है, बल्कि पहले से कहीं ज्यादा मज़बूत होकर लौटी है।
सिडनी टेस्ट: साहस की अनोखी गाथा
तीसरा टेस्ट सिडनी में हुआ। भारत के आधे खिलाड़ी चोटिल थे। लेकिन मैदान पर जज़्बे की मिसाल बनीं चेतेश्वर पुजारा, हनुमा विहारी और रविचंद्रन अश्विन।
• विहारी की हैमस्ट्रिंग खिंची हुई थी।
• अश्विन की पीठ अकड़ी हुई थी।
• पुजारा पर लगातार बाउंसर बरस रहे थे।
फिर भी इन तीनों ने घंटों बल्लेबाजी की और मैच को ड्रॉ कराया। यह ड्रॉ जीत के बराबर था। इसने दिखा दिया कि भारतीय टीम किसी भी हालात में हार मानने वाली नहीं है।
ब्रिसबेन टेस्ट: गाबा का किला टूटा
अब सीरीज़ 1-1 से बराबरी पर थी। निर्णायक मुकाबला होना था ब्रिसबेन के गाबा में।
गाबा, जहां ऑस्ट्रेलिया पिछले 32 सालों से अजेय था।
भारत के पास न विराट कोहली थे, न बुमराह, न अश्विन, न जडेजा। टीम लगभग सेकंड-इलेवन जैसी लग रही थी।
पहली पारी
ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी कर 369 रन बनाए। भारत ने जवाब में 336 रन जुटाए।
दूसरी पारी: सिराज और शार्दुल की शेरदिली
मोहम्मद सिराज, जिन्होंने दौरे के दौरान अपने पिता को खोया था लेकिन टीम का साथ नहीं छोड़ा, उन्होंने दूसरी पारी में 5 विकेट झटके।
शार्दुल ठाकुर ने 4 विकेट लेकर ऑस्ट्रेलिया को 294 रन पर समेट दिया।
भारत को जीत के लिए चाहिए थे 327 रन। गाबा में, चौथी पारी में, कंगारुओं के खिलाफ। असंभव सा लक्ष्य।
शुभमन गिल और पुजारा: साहस और क्लास की साझेदारी
रोहित शर्मा जल्दी आउट हो गए। लेकिन फिर मैदान पर उतरे युवा शुभमन गिल और दीवार समान चेतेश्वर पुजारा।
• गिल ने 91 रन की आक्रामक और क्लासी पारी खेली।
• पुजारा ने शरीर पर गेंदें झेलीं, कई बार चोटिल हुए, लेकिन डटे रहे। उनका 56 रन साहस की मिसाल था।
ऋषभ पंत: जीत का नायक
जैसे-जैसे मैच रोमांचक मोड़ पर पहुंचा, वैसे-वैसे हर भारतीय की नज़रें टीवी पर थीं। तभी आए युवा ऋषभ पंत।
उन्होंने नाथन लायन को छक्कों-चौकों से जवाब दिया। तेज़ गेंदबाज़ों पर काउंटर अटैक किया।
पुजारा और मयंक के आउट होने के बाद भी पंत ने हार नहीं मानी।
वॉशिंगटन सुंदर और पंत की साझेदारी ने जीत की नींव रखी।
पंत ने 89 नाबाद रन बनाकर भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाई।
टूटा गाबा का घमंड – जीत की पुकार
जैसे ही पंत ने विनिंग शॉट मारा, कमेंट्री बॉक्स से आवाज़ आई –
“टूटा है गाबा का घमंड!”
यह सिर्फ एक लाइन नहीं थी। यह गर्व, संघर्ष और जीत की घोषणा थी। उस दिन भारतीय क्रिकेट ने साबित कर दिया कि इरादे मज़बूत हों तो कोई किला अजेय नहीं रहता।
इस जीत का महत्व
1. मानसिक ताकत का प्रमाण – एडिलेड की हार से उबरकर सीरीज़ जीतना असाधारण था।
2. युवा खिलाड़ियों का उदय – शुभमन गिल, वॉशिंगटन सुंदर, शार्दुल ठाकुर और सिराज जैसे खिलाड़ियों ने दुनिया को अपनी ताकत दिखाई।
3. कप्तानी का जादू – अजिंक्य रहाणे ने शांत और संयमित नेतृत्व से टीम को संभाला।
4. क्रिकेट इतिहास की सबसे बड़ी वापसी – हार की गहराई से निकलकर जीत की ऊंचाई पर पहुंचना।
निष्कर्ष: गाबा की जीत – सिर्फ क्रिकेट नहीं, क्रांति थी
गाबा में भारत की जीत सिर्फ क्रिकेट का परिणाम नहीं थी। यह हर उस इंसान की कहानी थी, जो हालात से टूटता नहीं, बल्कि और मज़बूत होकर उभरता है।
जब भी क्रिकेट इतिहास की सबसे बड़ी वापसी का जिक्र होगा, ब्रिसबेन 2021 और “टूटा है गाबा का घमंड” हमेशा गूंजेगा।
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FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1: गाबा टेस्ट क्यों ऐतिहासिक माना जाता है?
गाबा टेस्ट इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि भारत ने चौथी पारी में 327 रन का लक्ष्य हासिल कर 32 साल से अजेय ऑस्ट्रेलिया को उसके किले में हराया।
Q2: गाबा टेस्ट में भारत के हीरो कौन रहे?
ऋषभ पंत (89*), शुभमन गिल (91), चेतेश्वर पुजारा (56), मोहम्मद सिराज (5 विकेट) और शार्दुल ठाकुर (4 विकेट) हीरो रहे।
Q3: अजिंक्य रहाणे की कप्तानी क्यों यादगार रही?
रहाणे ने विराट कोहली की गैरमौजूदगी में टीम को संभाला और शांत कप्तानी से युवा खिलाड़ियों में आत्मविश्वास जगाया।
Q4: ‘टूटा है गाबा का घमंड’ किसने कहा था?
यह प्रसिद्ध लाइन कमेंटेटर विवेक राजदान ने भारत की जीत के तुरंत बाद कही थी।
Q5: गाबा की इस जीत से भारतीय क्रिकेट को क्या सीख मिली?
यह जीत दिखाती है कि टीमवर्क, साहस और आत्मविश्वास किसी भी मुश्किल को आसान बना सकते हैं।
