प्रस्तावना: वीर सावरकर: क्रांतिकारी या विवादों का चेहरा?
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास जब-जब लिखा जाएगा, विनायक दामोदर सावरकर का नाम वहां स्वर्ण अक्षरों में दर्ज मिलेगा। वे कवि थे, लेखक थे, चिंतक थे, राष्ट्रवादी थे और सबसे बढ़कर एक निडर क्रांतिकारी। लेकिन आज़ादी के 75 साल बाद भी सावरकर विवादों के घेरे में क्यों हैं?
उन पर तीन बड़े आरोप लगाए जाते हैं—
1. वे असली क्रांतिकारी नहीं थे, क्योंकि उन्होंने जेल में रहते हुए अंग्रेजों को कई बार माफीनामे लिखे।
2. उन पर गांधीजी की हत्या की साजिश में शामिल होने का संदेह जताया जाता है।
3. आज जो हिंदुत्व की राजनीति दिखती है, उसका बीज सावरकर ने बोया, इसलिए उन्हें सांप्रदायिक बताया जाता है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या ये आरोप इतिहास की सच्चाई हैं या किसी राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा? आइए गहराई से समझते हैं।
सावरकर की क्रांतिकारी शुरुआत और अंग्रेजों से टकराव
1909 का साल भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का अहम मोड़ था। उसी वर्ष लंदन में भारतीय क्रांतिकारी मदनलाल ढींगरा ने अंग्रेज अधिकारी सर विलियम वायली की हत्या कर दी। हथियार कहाँ से आया? शक सावरकर पर गया, लेकिन सबूत न होने के कारण वे बच गए।
कुछ ही महीनों बाद, जब सावरकर के भाई गणेश सावरकर को अंग्रेजी हुकूमत ने जेल में डाल दिया, तो इसके विरोध में अनंत लक्ष्मण कनेरी ने नासिक के जिला मजिस्ट्रेट जैक्सन की हत्या कर दी। जांच में यह खुलासा हुआ कि हथियार लंदन से सावरकर ने भेजे थे। इसके बाद सावरकर को गिरफ्तार कर भारत लाया गया।
समुद्र से तैरकर भागने का साहस
गिरफ्तारी के बाद उन्हें जहाज से भारत लाया जा रहा था। इसी दौरान सावरकर गार्ड को चकमा देकर समुद्र में कूद पड़े और कई मील तैरते हुए किनारे तक पहुंचे। हालांकि घायल अवस्था में वे फिर पकड़े गए। यह घटना ही बताती है कि वे मौत से डरने वाले नहीं थे।
अंडमान की सेल्युलर जेल: एक नरक का सच
सावरकर को 50 साल की दोहरी आजीवन कारावास की सजा मिली और उन्हें सेल्युलर जेल (काला पानी) भेजा गया।
• उन्हें 52 नंबर की कोठरी में रखा गया।
• कैदियों को बैलगाड़ी की जगह अंग्रेजों की बग्घी खींचने पर मजबूर किया जाता।
• लगातार यातनाएँ, हथकड़ियाँ, और मजबूरी में खड़े रहना उनकी दिनचर्या थी।
• हर महीने 5-6 कैदियों को फांसी पर लटकते देखना पड़ता।
इतने अमानवीय हालात में, जहां मौत हर रोज सामने खड़ी रहती, वहां सावरकर ने पत्थरों से लिखते-लिखते 6,000 कविताएं रचीं।
माफीनामा: डर या रणनीति?
सावरकर ने जेल में रहते हुए अंग्रेज सरकार को कुल छह बार माफीनामे लिखे। विरोधी इसे उनका डर कहते हैं। लेकिन सावरकर का अपना तर्क था —
“यह माफी मेरी रणनीति है। जैसे मोहम्मद गौरी हर बार हारने के बाद माफी मांग कर लौट जाता था, ताकि अगली बार और ताकत से लड़े।”
अगर सावरकर वास्तव में डरपोक होते, तो वे इंग्लैंड में रहते हुए ही आराम से जीवन बिता सकते थे। वे क्यों हथियार भेजते? क्यों अंग्रेज अधिकारियों पर हमले करवाते? क्यों फांसी का खतरा उठाते?
नेहरू का माफीनामा और दोहरा मापदंड
सावरकर विरोधी माफीनामे का मुद्दा उठाते हैं, लेकिन जवाहरलाल नेहरू का किस्सा भूल जाते हैं।
1923 में नेहरू को नाभा जेल में दो साल की सजा हुई। महज़ तीन दिन में, जब वे सहन नहीं कर पाए, तो उनके पिता मोतीलाल नेहरू ने वायसराय से सिफारिश लगवाई। नेहरू ने माफीनामा लिखा और तुरंत रिहा हो गए।
तो सवाल उठता है —
अगर नेहरू का माफीनामा रणनीति था तो सावरकर का क्यों नहीं?
गांधी हत्या का आरोप: सच या राजनीतिक एजेंडा?
कुछ लोग कहते हैं कि सावरकर गांधीजी की हत्या की साजिश में शामिल थे। लेकिन —
• कोई ठोस सबूत कभी नहीं मिला।
• कपूर कमीशन भी नतीजे पर नहीं पहुंच सका।
• खुद गांधीजी ने लंदन में सावरकर से मिलने के बाद उन्हें बहादुर, चतुर और सच्चा देशभक्त बताया था।
सोचिए, अगर सावरकर वाकई गांधी के हत्यारे होते, तो क्या कांग्रेस सरकार उनकी पेंशन शुरू करती? क्या इंदिरा गांधी उनके नाम का डाक टिकट जारी करती?
सावरकर और हिंदुत्व का विचार
असल विवाद शायद उनके हिंदुत्व के विचार से है।
सावरकर ने कहा था —
“भारत एक हिंदू राष्ट्र है। यहाँ की संस्कृति, परंपरा और सभ्यता हिंदू है। बाकी सभी धर्म इस भूमि में शांति से रह सकते हैं।”
यानी उनका हिंदुत्व राजनीतिक कम, सांस्कृतिक ज्यादा था। यही सोच उनके विरोध का सबसे बड़ा कारण बनी।
निष्कर्ष: वीर सावरकर का असली मूल्यांकन
वीर सावरकर को कायर कहना इतिहास और सत्य दोनों का अपमान है।
• जो इंसान जेल में 50 साल की सजा काटता है,
• जो अंग्रेजों से लोहा लेने के लिए इंग्लैंड में रहते हुए भी हथियार भेजता है,
• जो समुद्र में कूदकर भागने की कोशिश करता है,
• और जो काला पानी जैसी नर्क जैसी जेल में भी कविताएँ रचता है,
वह डरपोक नहीं, बल्कि सच्चा योद्धा है।
असल सवाल माफीनामे का नहीं, बल्कि उनकी विचारधारा का है। सावरकर आज भी इसलिए विवादों में हैं क्योंकि उन्होंने भारत को हिंदू राष्ट्र के रूप में देखने का सपना देखा।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: क्या वीर सावरकर ने सचमुच अंग्रेजों से माफी मांगी थी?
हाँ, उन्होंने माफीनामे लिखे थे। लेकिन उनका तर्क था कि यह रणनीति का हिस्सा था, डर की वजह से नहीं।
Q2: क्या सावरकर गांधीजी की हत्या में शामिल थे?
नहीं। कोई भी ठोस सबूत उनके खिलाफ नहीं मिला। कपूर कमीशन भी निष्कर्ष तक नहीं पहुँचा।
Q3: वीर सावरकर को कितनी सजा मिली थी?
उन्हें 50 साल की दोहरी आजीवन कारावास की सजा मिली थी और करीब 10 साल अंडमान की सेल्युलर जेल में रहे।
Q4: सावरकर और नेहरू दोनों ने माफीनामा क्यों लिखा?
सावरकर ने 50 साल की सजा और असहनीय यातनाओं के बीच रणनीतिक तौर पर माफी मांगी। जबकि नेहरू ने महज़ 3 दिन बाद दो साल की सजा से बचने के लिए माफीनामा लिखा।
Q5: सावरकर को लेकर सबसे बड़ा विवाद क्या है?
सबसे बड़ा विवाद उनके हिंदुत्व के विचार को लेकर है, जिसे कुछ लोग सांप्रदायिक मानते हैं।
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