विश्व

अमेरिका-यूरोप संबंध और एशिया की नई शक्ति-संतुलन

अमेरिका और पश्चिमी यूरोप के रिश्तों में बढ़ते तनाव ने वैश्विक राजनीति को नई दिशा दी है। एशिया की शक्तियाँ (भारत, चीन, रूस और जापान) अब नए शक्ति-संतुलन का केंद्र बन रही हैं।

भारत और सोवियत संघ के प्रतिनिधि 1971 की भारत-सोवियत शांति और मैत्री संधि पर हस्ताक्षर करते हुए।
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भारत-सोवियत संधि 1971: भरोसा नहीं, कूटनीतिक समझौते का खेल

भारत-सोवियत संधि 1971 केवल दोस्ती नहीं, बल्कि रणनीतिक समझौते का परिणाम थी। जानिए कैसे इस संधि ने बांग्लादेश मुक्ति संग्राम, भारत-पाक युद्ध और दक्षिण एशिया की कूटनीति को बदल दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन SCO शिखर सम्मेलन में हाथ मिलाते हुए
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मोदी-पुतिन मुलाकात: SCO शिखर सम्मेलन में भारत-रूस संबंधों की नई दिशा

तियानजिन में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी-पुतिन मुलाकात ने भारत-रूस संबंधों को नई मजबूती दी और यूक्रेन संकट पर शांति की अपील की।

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग आपस में हाथ मिलाते हुए, पीछे भारत और चीन के राष्ट्रीय ध्वज।
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भारत-चीन संबंध और क्वाड-ब्रिक्स की कूटनीति

भारत की विदेश नीति आज संतुलन साधने की कला का अनोखा उदाहरण है। अमेरिका, चीन और रूस के बीच जटिल समीकरणों में मोदी सरकार ने राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखते हुए क्वाड और ब्रिक्स दोनों में रणनीतिक भूमिका निभाई है। यही संतुलन भविष्य में भारत को वास्तविक वैश्विक शक्ति बनाएगा।