भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल की उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीर, जो भारत की विदेश नीति की मजबूती और रणनीतिक स्वायत्तता का प्रतीक है।
भारत

भारत की विदेश नीति: डोवाल-जयशंकर युग का स्वर्णिम दौर

भारत की विदेश नीति को अक्सर आलोचना का सामना करना पड़ता है, लेकिन सच्चाई यह है कि आज भारत रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों के बीच संतुलन साधने में सफल रहा है।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत-रूस साझेदारी को दर्शाते हुए, दोनों नेताओं के पीछे उनके राष्ट्रीय झंडे
विश्व

रूस का 5% डिस्काउंट: भारत–अमेरिका रिश्तों में नई तनातनी

रूस का 5% डिस्काउंट भारत के लिए आर्थिक वरदान है, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों ने भारत–अमेरिका रिश्तों में अविश्वास की दीवार खड़ी कर दी है।

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग हाथ मिलाते हुए, पीछे से डोनाल्ड ट्रम्प तनावग्रस्त नज़र आ रहे हैं।
विश्व

ट्रम्प, भारत-चीन और नया व्यापार समीकरण

डोनाल्ड ट्रम्प की टैरिफ नीतियों ने भारत-चीन संबंधों और ब्रिटेन डील को नया मोड़ दिया है। जानिए कैसे यह वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर रहा है।

द बंगाल फाइल्स का पोस्टर – बाईं ओर आग की लपटों के बीच नाटकीय दृश्य और दाईं ओर फिल्ममेकर विवेक अग्निहोत्री का पोर्ट्रेट
मनोरंजन

द बंगाल फाइल्स: आज़ादी, इतिहास और सेंसरशिप की जंग

विवेक अग्निहोत्री की फिल्म ‘द बंगाल फाइल्स’ ट्रेलर लॉन्च रद्द होने के बाद अभिव्यक्ति की आज़ादी, राजनीतिक दबाव और सिनेमा की शक्ति पर नई बहस छेड़ रही है।

अर्ध सत्य (1983) फ़िल्म का एक दृश्य जिसमें ओम पुरी पुलिस अधिकारी की वर्दी में दिख रहे हैं और उनके सामने दूसरा किरदार खड़ा है। बीच में निर्देशक गोविंद निहलानी की तस्वीर का कोलाज।
मनोरंजन

अर्ध सत्य: ओम पुरी और गोविंद निहलानी की क्लासिक फ़िल्म की कहानी

अर्ध सत्य (1983) ओम पुरी और गोविंद निहलानी की क्लासिक फ़िल्म है जिसने पुलिस ड्रामा को नए दृष्टिकोण से पेश किया और आज भी भारतीय सिनेमा में मील का पत्थर मानी जाती है।

भारतीय प्रधानमंत्री पारंपरिक केसरिया पगड़ी और त्रिवर्ण ध्वज वाली अंगवस्त्र पहनकर रेड कार्पेट पर परेड का निरीक्षण करते हुए।
राजनीति

भारत का अभिजात वर्ग और विपक्ष: मोदी युग में झूठ और हिंसा की राजनीति

भारत में विपक्ष और अभिजात वर्ग मोदी सरकार को चुनौती देने में नाकाम रहे हैं। झूठे नैरेटिव, हिंसक आंदोलन और जातिगत राजनीति के बावजूद जनता ने नरेंद्र मोदी पर भरोसा जताया। विपक्ष के पास ठोस विकास एजेंडा नहीं होने से उसकी रणनीति आज भी कमजोर साबित हो रही है।