आसिम मुनीर की अमेरिका यात्रा: सेंटकॉम, भारत और खतरे का खेल

पाकिस्तानी फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर और अमेरिकी सेंटकॉम कमांडर आमने-सामने खड़े हैं, बीच में यूएस सेंट्रल कमांड का प्रतीक चिन्ह दिखाई दे रहा है।

भारत-विरोधी धमकियों से शुरू हुआ नया दौर

पाकिस्तान के फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर एक बार फिर सुर्ख़ियों में हैं। अमेरिका ने उन्हें फिर से आमंत्रित किया और इस बार उनकी मुलाक़ात सीधे यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर से हुई।

मुलाक़ात के बाद उनके भाषण ने भारतीय रणनीतिक हलकों में चिंता बढ़ा दी। उन्होंने खुलेआम कहा —

“अगर भारत के साथ परमाणु युद्ध हुआ, तो पाकिस्तान आधी दुनिया को अपने साथ ले डूबेगा।”

इतना ही नहीं, उन्होंने भारत के सिंधु जल समझौते के संदर्भ में भी धमकी दी। भारत के बांधों को 10 मिसाइलों से उड़ाने की बात कही। यह वही पाकिस्तान है जो ऑपरेशन सिंदूर में भारत के सटीक मिसाइल हमलों का सामना नहीं कर पाया था।

CENTCOM: अमेरिका का मध्य-पूर्वी मोर्चा

अमेरिका की सैन्य संरचना क्षेत्रीय कमांड्स में बंटी है।

• इंडो-पैसिफिक कमांड – भारत, चीन, हिंद महासागर

• अफ्रीकन कमांड – अफ्रीका क्षेत्र

• सेंट्रल कमांड (CENTCOM) – ईरान, अफगानिस्तान, इराक और खाड़ी देश

CENTCOM का सबसे अहम मिशन आज ईरान पर नज़र रखना और संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार रहना है। पाकिस्तान की अमेरिका में यही अहमियत है। इतिहास में अफगानिस्तान युद्ध और “वॉर ऑन टेरर” में वह अमेरिका का “जियोपॉलिटिकल टूल” रहा है।

पाकिस्तान–CENTCOM का पुराना रिश्ता

सोवियत-अफगान युद्ध से लेकर तालिबान के दौर तक, पाकिस्तान CENTCOM के लिए गुप्त ऑपरेशन हब रहा।

• अमेरिका ने पाकिस्तान को निशान-ए-इम्तियाज़ जैसे सम्मान दिए।

• CENTCOM कमांडर को पाकिस्तान में “विशेष अतिथि” का दर्जा मिलता है।

• बदले में पाकिस्तान ने ईरान और अफगान मोर्चों पर अमेरिका को सहयोग दिया।

मुनीर की यह यात्रा भी इसी कड़ी का हिस्सा है। अमेरिका को भरोसा है कि जब ईरान पर एंडगेम आएगा, पाकिस्तान फिर उसके लिए मोहरा बनेगा।

भारत के खिलाफ बयान और अमेरिका की चुप्पी

सबसे बड़ा सवाल है की अमेरिका यह कैसे बर्दाश्त कर रहा है कि उसकी धरती पर खड़े होकर पाकिस्तान का शीर्ष सैन्य अधिकारी भारत को धमकाए?

इसके दो कारण हैं:

1. रणनीतिक प्राथमिकता का अंतर – अमेरिका भारत को इंडो-पैसिफिक में देखता है, जहां उसका मुख्य फोकस चीन है।

2. CENTCOM–पाकिस्तान सामंजस्य – पाकिस्तान, अमेरिका के लिए ईरान और अफगानिस्तान के मामलों में एक उपयोगी पार्टनर है।

इज़राइल, भारत और ऑपरेशन सिंदूर

दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान ने हाल ही में इज़राइल को भी धमकी दी। वहीं, इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत को खुलकर समर्थन दिया और कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में इज़राइली हथियारों का इस्तेमाल हुआ।

संभव है इसमें बराक-8 मिसाइल सिस्टम और उन्नत ड्रोन शामिल रहे हों। इसने पाकिस्तान के मिसाइल कार्यक्रम की पोल खोल दी।

भविष्य की भू-राजनीतिक शतरंज

आने वाले महीनों में कई बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम होंगे जो इस समीकरण को और जटिल बना देंगे:

• मोदी की चीन यात्रा

• पुतिन की भारत यात्रा

• रूस–अमेरिका शिखर सम्मेलन (ट्रंप–पुतिन मुलाक़ात)

इन सबके बीच, आसिम मुनीर की अमेरिका यात्रा यह संकेत देती है कि पाकिस्तान आने वाले समय में अमेरिका की मध्य-पूर्वी रणनीति में और गहरे जुड़ सकता है और भारत को दो मोर्चों पर रणनीतिक संतुलन साधना होगा।

निष्कर्ष: असली खेल CENTCOM का है

आसिम मुनीर की अमेरिका यात्रा और सेंटकॉम से मुलाक़ात एक साधारण सैन्य कूटनीति नहीं, बल्कि एक बड़े भू-राजनीतिक खेल का हिस्सा है।

• अमेरिका, पाकिस्तान को अपने मध्य-पूर्वी एजेंडे के लिए इस्तेमाल करेगा।

• पाकिस्तान, भारत विरोधी बयानबाज़ी से अपने घरेलू और विदेशी समर्थकों को संतुष्ट करेगा।

• भारत को इंडो-पैसिफिक और मध्य-पूर्व दोनों में अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत रखनी होगी।

यह कहानी सिर्फ़ एक यात्रा की नहीं, बल्कि विश्व व्यवस्था के बदलते समीकरणों की है और आने वाला समय बताएगा कि इस खेल में कौन बाज़ी मारता है।

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