प्रस्तावना
भारतीय क्रिकेट इतिहास सिर्फ रिकॉर्ड्स और ट्रॉफियों की कहानी नहीं है, बल्कि यह उन फैसलों और विश्वास की गाथा है जिसने खिलाड़ियों को लीजेंड बनाया। आज जब हम महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) को दुनिया के सबसे सफल कप्तानों और विकेटकीपर-बल्लेबाजों में गिनते हैं, तो सवाल उठता है – धोनी को आखिर बनाया किसने?
ज़ाहिर है, जवाब में कई लोग सौरव गांगुली का नाम लेंगे। लेकिन कहानी इतनी सीधी भी नहीं है। इसके पीछे एक किस्सा है, जो भारतीय क्रिकेट लीडरशिप की असली समझ को उजागर करता है।
धोनी की शुरुआती मुश्किलें – डक से शुरुआत
धोनी का इंटरनेशनल करियर 2004 में बांग्लादेश के खिलाफ शुरू हुआ। डेब्यू मैच में वह पहली ही गेंद पर रन आउट हो गए – जीरो!
इसके बाद दो और मैचों में भी उनका बल्ला खास नहीं चला। जब पाकिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज शुरू हुई, तब भी धोनी के लिए कुछ नहीं बदला।
उनके करियर पर सवाल उठने लगे। क्या धोनी का सफर यहीं खत्म हो जाएगा?
धोनी का इंतजार – “3 नंबर कब मिलेगा?”
इस दौरान धोनी अपने दोस्तों से कहते – “कहा तो गया था कि किसी मैच में हमें 3 नंबर पर ट्राई करेंगे। लेकिन अभी तो ये भी पता नहीं कि हम कल खेल भी रहे हैं कि नहीं।”
ये उस खिलाड़ी की बेचैनी थी, जिसके अंदर अपार प्रतिभा थी लेकिन उसे सही मौका नहीं मिल रहा था।
गांगुली का मास्टरस्ट्रोक – रिस्क वाला फैसला
विशाखापत्तनम (Vizag) वनडे – भारत बनाम पाकिस्तान, 2005
यही वह मैच था जिसने भारतीय क्रिकेट की दिशा बदल दी।
सौरव गांगुली ने खुद टॉक शो में बताया:
“मैं पूरी रात सोचता रहा कि इस लड़के को (धोनी को) खिलाड़ी कैसे बनाया जाए। सुबह जब टॉस जीतकर ड्रेसिंग रूम लौटा, तो अचानक फैसला किया की धोनी को 3 नंबर पर भेजते हैं। जो होगा देखा जाएगा।”
धोनी उस समय शॉर्ट्स में बैठे थे, क्योंकि उन्हें पता था कि सातवें नंबर पर देर से ही बैटिंग मिलेगी।
गांगुली ने आवाज लगाई – “धोनी! आज तू 3 नंबर पर जाएगा।”
धोनी चौंक गए। पूछा – “और दादा आप?”
गांगुली ने मुस्कुराकर कहा – “मैं 4 नंबर खेलूँगा। तू जा 3 पर।”
धोनी का धमाका – 148 रनों की ऐतिहासिक पारी
फिर जो हुआ, उसने क्रिकेट इतिहास बदल दिया। धोनी ने 123 गेंदों पर 148 रन ठोक डाले। पाकिस्तान जैसे मजबूत विपक्ष के खिलाफ उनकी यह पारी सिर्फ रन नहीं थी, बल्कि एक घोषणा थी की “अब भारतीय क्रिकेट में एक नया सितारा चमक चुका है।”
गांगुली का विजन – खिलाड़ी बनाना ही असली लीडरशिप
गांगुली ने कहा था –
“खिलाड़ी पीछे बैठकर नहीं बनते। आपको उन्हें मौके पर आगे फेंकना पड़ता है, तभी उनका पोटेंशियल निकलकर आता है।”
यह बयान साबित करता है कि गांगुली सिर्फ कप्तान नहीं, बल्कि टीम बिल्डर (Team Builder) थे। उन्होंने हरभजन सिंह, युवराज सिंह, मोहम्मद कैफ, वीरेंद्र सहवाग जैसे खिलाड़ियों को मौके देकर तराशा। और धोनी को बैक करने का उनका यह मास्टरस्ट्रोक भारतीय क्रिकेट की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक साबित हुआ।
धोनी का गांगुली को सम्मान – आखिरी टेस्ट की कप्तानी
गांगुली का भरोसा धोनी कभी नहीं भूले।
2008 में नागपुर टेस्ट गांगुली का आखिरी टेस्ट मैच था। मैच के आखिरी कुछ ओवरों में धोनी ने कप्तानी गांगुली को सौंप दी। पूरा स्टेडियम खड़ा होकर तालियाँ बजा रहा था। धोनी ने ये संदेश दिया – “आज मैं जो हूँ, उसमें दादा का बड़ा योगदान है।”
धोनी को किसने बनाया? जवाब सिर्फ एक नाम
अगर आज हम देखते हैं कि धोनी ने रोहित शर्मा, विराट कोहली, रविंद्र जडेजा, रविचंद्रन अश्विन जैसे खिलाड़ियों को मौका देकर तराशा, तो यह उसी परंपरा की कड़ी है जिसे गांगुली ने शुरू किया था।
गांगुली ने धोनी पर विश्वास किया, और धोनी ने अगली पीढ़ी पर। यही भारतीय क्रिकेट की सबसे बड़ी ताकत है – लीडरशिप की विरासत।
निष्कर्ष
तो सवाल – धोनी को किसने बनाया?
जवाब साफ है –
सौरव गांगुली ने अपने साहसिक फैसले से धोनी को मौका दिया। और धोनी ने उस मौके को हाथोंहाथ लिया और भारतीय क्रिकेट को नई ऊँचाई पर पहुँचा दिया।
यह कहानी सिर्फ क्रिकेट की नहीं है, बल्कि लीडरशिप और विश्वास की असली मिसाल है। आज अगर धोनी “कैप्टन कूल” कहलाते हैं, तो इसके पीछे दादा का मास्टरस्ट्रोक जरूर याद रखना चाहिए।
