क्या Reliance Jamnagar रिफाइनरी सिर्फ रूसी कच्चा तेल शोधन कर रही है? जानिए कैसे यह संयंत्र 1.4 मिलियन बैरल/दिन से हर स्रोत का तेल प्रोसेस करता है और कीमतें स्थिर रखता है।
क्या रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी सिर्फ रूसी कच्चे तेल का प्रोसेसिंग हब बन गई है? इन दिनों इंटरनेट और मीडिया में यह धारणा बनी हुई है कि भारतीय कंपनियाँ विशेषकर Reliance सिर्फ रूसी तेल पर निर्भर होकर बड़ा मुनाफा कमा रही हैं।
मैंने खुद पहल किया यह सवाल उठाने का: “क्या रूस-यूक्रेन विवाद के पहले भी जामनगर का तेलशोधक संयंत्र इतना सक्रिय था या फिर अब अचानक ही रूस का तेल ही सब कुछ बन गया है?”
तो चलिए, जानिए कि 2001 से चल रहा यह विशाल संयंत्र जो आज 1.4 मिलियन (14 लाख) बैरल कच्चा तेल प्रतिदिन शुद्ध करता है, देश में तेल की आपूर्ति कैसे करता रहा है। चाहे तेल किसी भी देश से आए ईरान हो, वेनेज़ुएला हो या सऊदी अरब… जामनगर उसे प्रोसेस करने में सक्षम है। और यही नहीं सिर्फ भारत, बल्कि विश्व स्तर पर उसकी प्रतिस्पर्धा के मायने हैं।
Jamnagar Refinery क्षमता और विविधता
2001 से 1.4 मिलियन बैरल/दिन की शोधन क्षमता
रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी विश्व की सबसे बड़ी रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स में से एक है। वर्ष 2001 से ही इसकी कार्यक्षमता लगभग 1.4 मिलियन बैरल कच्चे तेल का शोधन प्रतिदिन रही है। यानी, यह किसी एक स्रोत जैसे रूस, पर निर्भर नहीं है, बल्कि विभिन्न देशों से आने वाले कच्चे तेल को प्रोसेस करता रहा है।
स्रोतों की आज़ादी : कोई भी तेल, कोई भी ग्रेड
पहले भारत की रिफाइनरियाँ प्रायः एक ग्रेड तेल पर केंद्रित हुआ करती थीं। उदाहरण के तौर पर, जो इकाई ईरान के कच्चे तेल के हिसाब से डिजाइन की गई हो, वह सऊदी तेल के लिए उपयुक्त नहीं होती थी। लेकिन जामनगर की प्रणाली में ऐसी कोई पाबंदी नहीं है।
चाहे तेल रूस से आए, ईरान से, वेनेज़ुएला से, या कहीं और से जामनगर हर प्रकार के कच्चे तेल को प्रोसेस करने में सक्षम है। अगर रूस, ईरान और वेनेज़ुएला से तेल नहीं आया, तो वह कहीं और से आएगा।
लाभ संरचना और कीमत स्थिरता
तेल का भाव : उपभोक्ता पर प्रभाव
यदि किसी विशेष स्रोत का तेल महंगा हो जाता है, मान लीजिए 60 डॉलर का बैरल से कीमत बढ़कर 80 या 100 डॉलर हो जाए, तो क्या रिलायंस का लाभ प्रभावित होगा? उत्तर है – नहीं। कंपनी अपनी शोधन क्षमता का उपयोग करते हुए मुनाफे के लिए कीमत समायोजन कर लेती है।
लेकिन उपभोक्ता की जेब पर इसका असर पड़ता है। महंगे इनपुट का असर पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों में दिखाई देता है। फिर भी, भारत में तेल कीमतों में अस्थिरता अपेक्षाकृत कम देखी जाती है।
रात 9 बजे के दामों में बदलाव का सवाल
आख़िरी बार कब आपने देखा कि पेट्रोल-डीज़ल के दाम रात 9 बजे अचानक बढ़ाए गए हों? और आप देर रात बाइक-स्कूटर कार लेकर फुल टैंक भरवाने गए हों, डरते हुए कि कीमतें और बढ़ जाएँ? शायद शायद ही कभी।
यह इस बात का सबूत है कि तेल की कीमतों में पूरी तरह कोई मनमानी नहीं होती, बल्कि नियम और नीतियाँ लागू होती हैं, जो आम उपभोक्ता को अचानक झटका से बचाते हैं।
वैश्विक संकटों के बावजूद भारत की कीमतों में स्थिरता
रूस-यूक्रेन संघर्ष और भारतीय तेल मार्केट
रूस-यूक्रेन विवाद ने तेल की वैश्विक आपूर्ति और कीमत में सांख्यिकीय प्रभाव डाला है। फिर भी, भारत में तेल कीमतों में अपेक्षाकृत स्थिरता बनी हुई है। इसका कारण है जामनगर जैसी रिफाइनरी की लचीली प्रणाली।
हमास-इजराइल युद्ध, Iran-Venezuela प्रतिबंध और भारत की स्थिति
रूस के अलावा, मध्य पूर्व और दक्षिण अमेरिका में परिस्थितियाँ जटिल रहीं—हमास-इजराइल युद्ध, ईरान और वेनेज़ुएला पर लगाए गए प्रतिबंध आदि। फिर भी, भारत की तेल आपूर्ति व्यवस्था प्रमुख रूप से जामनगर के माध्यम से संतुलन बनाए रखती रही है:
• विविध इनपुट स्रोत
• कला संयंत्र डिज़ाइन
• स्थिति नियंत्रण हेतु भंडारण और लॉजिस्टिक्स
इन तत्वों ने यह सुनिश्चित किया कि संकट के समय भी देश में पेट्रोल-डीज़ल की महंगाई में अचानक वृद्धि न हो, उपभोक्ता को संतुलित मूल्य मिलते रहें।
क्या Reliance सिर्फ रूसी तेल से फायदा उठा रही है?
यह धारणा भ्रामक है। अगर रूस-यूक्रेन विवाद के बाद Reliance को केवल रूसी तेल मिलता तो शायद कीमतों में उल्लेखनीय कमी आती, लेकिन यही शर्त नहीं है। असल में:
• जामनगर में हर प्रकार का तेल शुद्ध करने की क्षमता है।
• स्रोत बदलते रहने पर भी संयंत्र का संचालन निर्बाध रहता है।
• लाभ कमाने की दिशा में कंपनी लचीली है, लेकिन उपभोक्ता की कीमतें स्थिर रखने का प्रयास भी सतत जारी रहता है।
निष्कर्ष
तो, निष्कर्ष यह है कि Reliance का जामनगर रिफाइनरी “सिर्फ रूसी तेल” तक सीमित नहीं है। यह मशीन किसी भी स्रोत से आने वाले कच्चे तेल को प्रोसेस करने में सक्षम, और सफल भी रही है। यही वजह है कि even amidst global turmoil भारत में पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों में अत्यधिक अस्थिरता नहीं देखी जाती। इसका सीधा असर उपभोक्ता को संतुलित और विश्वसनीय तेल आपूर्ति से मिलता है।
