फौजी सीरियल से डेब्यू करने वाले विश्वजीत प्रधान का संघर्ष, करियर और परिवार की कहानी। जानिए मेरठ से मुंबई तक उनकी पूरी जीवन यात्रा।
परिचय
भारतीय टेलीविजन और सिनेमा ने कई ऐसे कलाकार दिए हैं जिनका चेहरा दर्शकों को तुरंत पहचान में आ जाता है, लेकिन नाम उतना चर्चित नहीं होता। विश्वजीत प्रधान भी उन्हीं कलाकारों में से एक हैं। 11 सितंबर 1965 को मेरठ में जन्मे विश्वजीत प्रधान ने टीवी सीरियल फौजी से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की। यही वह सीरियल था जिसने शाहरुख खान को भी स्टारडम की ओर बढ़ाया। लेकिन विश्वजीत प्रधान का सफर उतना आसान और सीधा नहीं रहा। आइए, आज उनके जन्मदिन के अवसर पर उनकी पूरी कहानी को जानते हैं।
फौजी सीरियल से डेब्यू और यासीन खान का किरदार
विश्वजीत प्रधान उस समय इलाहाबाद विश्वविद्यालय में लॉ की पढ़ाई कर रहे थे और साथ ही थिएटर से भी जुड़े हुए थे। जब उन्हें पता चला कि दिल्ली में एक नया सीरियल फौजी के लिए ऑडिशन हो रहे हैं, तो दोस्तों की सलाह पर वह दिल्ली पहुँचे। ऑडिशन के बाद कुछ दिनों में उन्हें खबर मिली कि वे यासीन खान के रोल के लिए सिलेक्ट हो गए हैं।
फौजी की शूटिंग के दौरान उनकी अच्छी दोस्ती शाहरुख खान और अन्य कलाकारों से हुई। इतना ही नहीं, उन्होंने शाहरुख और आयशा झुल्का के साथ एक ट्रैफिक अवेयरनेस एड फिल्म में भी काम किया।
थिएटर से गहरा नाता
इलाहाबाद में रहते हुए उन्होंने कैंपस थिएटर ग्रुप और अन्य स्थानीय थिएटर मंडलियों से नाटक किए। दिल्ली आने के बाद उन्होंने विख्यात नाटककार सफदर हाशमी के साथ भी काम किया। हाशमी की हत्या ने उन्हें गहरा आघात पहुँचाया और उन्होंने दिल्ली छोड़कर मुंबई जाने का निर्णय लिया।
मुंबई का संघर्ष
मुंबई आने पर उन्होंने अपनी बहन के घर ठिकाना बनाया, लेकिन जल्द ही वे पेइंग गेस्ट के तौर पर रहने लगे। संघर्ष का दौर लंबा चला। कई बार प्रोड्यूसर्स के पास गए, तस्वीरें छोड़ीं, लेकिन काम हाथ नहीं लगा। सबसे बड़ी मुश्किल यह रही कि वे बार-बार घर बदलते रहे और प्रोड्यूसर्स उन्हें ढूंढ नहीं पाते थे।
एक मजेदार किस्सा यह है कि उन्होंने प्रकाश मेहरा के घर फोन किया और चांदीवली स्टूडियो बुला लिया गया। उन्हें लगा कि बड़ा रोल मिलेगा, लेकिन वहाँ जाकर पता चला कि उन्हें जूनियर आर्टिस्ट समझ लिया गया था। इस अपमान ने उन्हें झकझोर दिया, लेकिन हार नहीं मानने दी।
पहली फिल्म और बॉलीवुड में एंट्री
साल 1991 में नाना पाटेकर की फिल्म प्रहार से उन्होंने बड़े परदे पर कदम रखा। इसके लिए उन्हें और अन्य कलाकारों को बेलगांव के मिलिट्री ट्रेनिंग स्कूल में कमांडो स्तर की ट्रेनिंग भी दी गई।
1992 में यलगार रिलीज हुई, जिसने उन्हें पहचान दिलाई। इसके बाद उन्होंने 250 से अधिक फिल्मों और कई टीवी सीरियल्स में अलग-अलग किरदार निभाए।
फिल्मों और टीवी में दमदार उपस्थिति
विश्वजीत प्रधान अक्सर विलेन या बैड बॉय रोल्स में नज़र आए। चाहे छोटे किरदार हों या बड़े, उन्होंने अपनी एक्टिंग से दर्शकों पर असर छोड़ा। बर्दाश्त, यलगार, प्रहार और कई अन्य फिल्मों में उनकी मौजूदगी ने उन्हें खास पहचान दिलाई।
टीवी शोज़ और हाल के वर्षों में वेब सीरीज़ में भी उन्होंने अपनी एक्टिंग का जलवा दिखाया।
परिवार और निजी जीवन
विश्वजीत प्रधान के पिता प्रीतम सिंह प्रधान कांग्रेस से दो बार विधायक रह चुके थे। हालांकि, जब विश्वजीत मात्र आठ-नौ साल के थे, तब पिता का निधन हो गया। उनके बड़े भाई डॉ. बिजेंद्र प्रधान मेरठ के मशहूर हड्डी रोग विशेषज्ञ हैं।
विश्वजीत की पत्नी सोनालिका प्रधान भी मेरठ से हैं और एक प्रसिद्ध फैशन डिज़ाइनर हैं। इस दंपति की दो संतानें हैं – बेटी ध्रुविका प्रधान और बेटा ओजस्वी प्रधान।
शाहरुख खान जितना स्टारडम क्यों नहीं मिला?
फौजी से डेब्यू करने वाले शाहरुख खान आज विश्व के सबसे बड़े सुपरस्टार्स में गिने जाते हैं। लेकिन उसी सीरियल से आए विश्वजीत प्रधान को वैसी ऊँचाई क्यों नहीं मिल पाई?
इसका जवाब शायद उनके चुनावों, किस्मत और फिल्म इंडस्ट्री की चालबाज़ियों में छिपा है। लेकिन इतना तय है कि किरदार चाहे छोटा हो या बड़ा, उन्होंने उसे जी भरकर निभाया। इसी वजह से दर्शक उनका चेहरा याद रखते हैं।
निष्कर्ष
विश्वजीत प्रधान भारतीय सिनेमा के उन अनमोल कलाकारों में से हैं जिन्हें भले ही सुपरस्टार का दर्जा न मिला हो, लेकिन उनकी मेहनत, संघर्ष और अभिनय को लोग कभी भूल नहीं सकते। फौजी से लेकर फिल्मों, टीवी और वेब सीरीज़ तक उनका सफर संघर्षों और अनुभवों से भरा रहा।
आज उनके जन्मदिन पर यही कहना उचित होगा कि – “हर चमकता सितारा आसमान में सबसे बड़ा नहीं होता, कुछ सितारे अपनी रोशनी से भी लोगों के दिलों में जगह बना लेते हैं। विश्वजीत प्रधान उन्हीं में से एक हैं।”
