परिचय
भारतीय क्रिकेट इतिहास में कुछ ऐसे खिलाड़ी रहे हैं जिन्हें सिर्फ उनके आँकड़ों से नहीं आँका जा सकता, बल्कि उनके धैर्य, जज्बे और संघर्ष से याद किया जाता है। चेतेश्वर पुजारा उन्हीं में से एक हैं। राहुल द्रविड़ के संन्यास के बाद जिस खालीपन को भरना लगभग असंभव लग रहा था, उसे राजकोट के इस बल्लेबाज़ ने भरा। वह बल्लेबाज़ जिसने यह साबित किया कि टेस्ट क्रिकेट केवल चौके-छक्कों का खेल नहीं है, बल्कि तकनीक, धैर्य और आत्मविश्वास का भी इम्तिहान है।
24 अगस्त 2025 को पुजारा ने क्रिकेट से संन्यास का ऐलान किया। यह केवल एक खिलाड़ी के करियर का अंत नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट की उस परंपरा का विराम है, जिसमें ‘दीवार’ जैसी मजबूत बल्लेबाज़ी की मिसाल दी जाती थी।
पुजारा और राहुल द्रविड़: पुरानी दीवार से नई दीवार तक
राहुल द्रविड़ को भारतीय क्रिकेट का “दीवार” कहा जाता था। उनके जाने के बाद सवाल यह था कि कौन होगा जो टीम को मुश्किल हालात में संभालेगा? यही जिम्मेदारी पुजारा ने अपने कंधों पर उठाई। उनकी तकनीक, क्रीज़ पर टिकने की क्षमता और गेंदबाज़ को थकाने का हुनर उन्हें द्रविड़ की राह का उत्तराधिकारी बनाता है।
जहाँ विराट कोहली आक्रामकता के प्रतीक थे, वहीं पुजारा धैर्य की मिसाल बने। यह संतुलन ही भारतीय टेस्ट टीम की असली ताकत थी।
शुरुआती करियर और पहली पहचान
पुजारा ने 2010 में बेंगलुरु टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 72 रनों की पारी खेली। इसी पारी से उन्होंने बता दिया कि यह बल्लेबाज़ लंबी रेस का घोड़ा है। 2012 में अहमदाबाद टेस्ट में इंग्लैंड के खिलाफ बनाए गए 206 रन ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित कर दिया। यह मैराथन पारी भारतीय टेस्ट टीम को नई मजबूती देने वाली थी।
ऑस्ट्रेलिया की धरती पर सुनहरे अध्याय
पुजारा के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि 2018-19 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी रही। उस सीरीज़ में उन्होंने 521 रन बनाए, जिसमें सिडनी टेस्ट की 193 रन की पारी आज भी अमर है। भारत ने पहली बार ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज़ जीती और इस जीत का सबसे बड़ा श्रेय पुजारा को मिला।
ऑस्ट्रेलिया के पैट कमिंस, जोश हेज़लवुड, मिशेल स्टार्क और नाथन लायन जैसे घातक गेंदबाज़ों के सामने उन्होंने एक दीवार की तरह बल्लेबाज़ी की। उस सीरीज़ का हर भारतीय फैन को इंतज़ार था और पुजारा ने उसे यादगार बना दिया।
गाबा का किला और पुजारा की बहादुरी
2021 का ब्रिस्बेन टेस्ट भारतीय क्रिकेट की सबसे ऐतिहासिक जीतों में से एक है। जब चौथे दिन ऑस्ट्रेलिया के गेंदबाज़ आग उगल रहे थे, तब पुजारा ने 211 गेंदों पर 56 रन बनाए। आँकड़ों में यह पारी भले बड़ी न लगे, लेकिन हर गेंद उनके शरीर पर चोट की तरह दर्ज हो रही थी।
उनकी इस जुझारू पारी ने ऋषभ पंत और शुभमन गिल को जीत की नींव रखने का मौका दिया। गाबा का किला टूटा और पुजारा उस जीत के अदृश्य नायक बने।
पुजारा का करियर: आँकड़े और उपलब्धियाँ
• टेस्ट करियर: 103 मैच, 43.60 की औसत से 7195 रन, 18 शतक और 35 अर्धशतक।
• वनडे करियर: 5 मैच, 51 रन।
• लिस्ट-ए क्रिकेट: 130 मैच, 5759 रन, 16 शतक।
• टी20 क्रिकेट: 71 मैच, 1556 रन, 1 शतक।
वनडे और टी20 में उन्हें मौके कम मिले, लेकिन घरेलू क्रिकेट में उनके आँकड़े बेहतरीन रहे।
क्यों पुजारा सिर्फ टेस्ट स्पेशलिस्ट बनकर रह गए?
पुजारा पर हमेशा ‘टेस्ट स्पेशलिस्ट’ का टैग चिपका रहा। उनका मानना था कि अगर उन्हें वनडे में ज्यादा मौके मिलते तो वह इस फॉर्मेट में भी सफल हो सकते थे। 2013-14 में उन्होंने केवल पांच वनडे खेले, लेकिन फिर कभी मौका नहीं मिला।
उनके शब्दों में—“टेस्ट करियर को दांव पर लगाकर मैं खुद को साबित नहीं कर सकता था। मेरे लिए टीम इंडिया के लिए टेस्ट खेलना ही सबसे बड़ी प्राथमिकता थी।”
कप्तानी और पुजारा
पुजारा को कभी भी भारतीय टीम की कप्तानी का मौका नहीं मिला। उनका कहना था “कप्तानी मांगने की चीज़ नहीं है। अगर जिम्मेदारी मिलती तो निभाता, लेकिन इसके बिना भी मैंने हमेशा टीम के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ दिया।”
चेतेश्वर पुजारा का असली योगदान
पुजारा का करियर यह बताता है कि क्रिकेट सिर्फ चमक-दमक का खेल नहीं है। उनके योगदान को शतक और अर्धशतक की गिनती से नहीं मापा जा सकता। कभी-कभी 30-40 रन भी उतने ही कीमती होते हैं, जितना कि कोई दोहरा शतक।
उन्होंने हमें यह सिखाया कि क्रिकेट में धैर्य और जज्बा भी उतना ही जरूरी है जितना आक्रामकता और स्ट्राइक रेट।
निष्कर्ष
चेतेश्वर पुजारा का संन्यास भारतीय क्रिकेट के लिए एक युग का अंत है। वह सिर्फ बल्लेबाज़ नहीं, बल्कि एक विचारधारा थे। जब क्रिकेट पूरी दुनिया में तेज़ और आक्रामक हो रही थी, तब पुजारा ने दिखाया कि टेस्ट क्रिकेट का असली सौंदर्य धैर्य और संघर्ष में है।
भारतीय फैंस हमेशा उन्हें याद करेंगे, उस दीवार को, जो हर बार टीम को मुश्किल वक्त में सहारा देती रही।
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FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. चेतेश्वर पुजारा ने कब संन्यास लिया?
पुजारा ने 24 अगस्त 2025 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की।
Q2. पुजारा ने भारत के लिए कितने टेस्ट मैच खेले?
उन्होंने भारत के लिए 103 टेस्ट मैच खेले और 7195 रन बनाए।
Q3. क्या पुजारा ने वनडे और टी20 खेले थे?
पुजारा ने केवल 5 वनडे मैच खेले, जबकि टी20 इंटरनेशनल खेलने का मौका कभी नहीं मिला।
Q4. पुजारा की सबसे यादगार पारी कौन सी मानी जाती है?
2018-19 की ऑस्ट्रेलिया सीरीज़ और 2021 का ब्रिस्बेन टेस्ट उनकी सबसे यादगार पारियों में गिने जाते हैं।
Q5. क्या पुजारा कप्तान बन सकते थे?
हालांकि उन्हें कभी कप्तानी नहीं मिली, लेकिन उनकी बल्लेबाज़ी और नेतृत्व क्षमता उन्हें उपयुक्त उम्मीदवार बनाती थी।
