कारगिल युद्ध और 1999 वर्ल्ड कप का भारत-पाकिस्तान मैच

कारगिल युद्ध के बीच खेले गए 1999 वर्ल्ड कप भारत-पाकिस्तान मैच की रोमांचक कहानी, मैदान का माहौल और वीरतापूर्ण जीत की गाथा।

परिचय: युद्ध और क्रिकेट का अद्भुत संगम

साल 1999 भारत के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो चुका है। एक ओर कारगिल की बर्फीली चोटियों पर भारतीय सैनिक पाकिस्तान की घुसपैठ का डटकर मुकाबला कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर इंग्लैंड की धरती पर क्रिकेट का महाकुंभ यानी आईसीसी वर्ल्ड कप 1999 खेला जा रहा था। उस समय देश की भावनाएं दो मोर्चों पर बंटी हुई थीं। एक ओर सीमा पर युद्ध का तनाव और दूसरी ओर क्रिकेट के मैदान में पाकिस्तान से भिड़ंत का जुनून।

भारत और पाकिस्तान दोनों टीमों के बीच सुपर सिक्स चरण में आमना-सामना हुआ। यह मैच केवल क्रिकेट का मुकाबला नहीं था, बल्कि यह गर्व, सम्मान और देशभक्ति से भरी एक ऐतिहासिक भिड़ंत थी।

मैनचेस्टर का युद्धभूमि बना मैदान

8 जून 1999 को मैनचेस्टर का ओल्ड ट्रैफर्ड स्टेडियम नीले और हरे रंग के झंडों से पट चुका था। दोनों देशों के समर्थकों का जोश देखते ही बनता था। स्टेडियम में बैठे हर शख्स के लिए यह मुकाबला जीवन-मरण जैसा था। सोशल मीडिया का जमाना तब नहीं था, टीवी चैनलों में भी इतनी सनसनीखेज बहसें नहीं होती थीं, लेकिन लोगों के दिलों में भावनाओं का तूफान मचा हुआ था।

यह मैच भारत के लिए बेहद अहम था क्योंकि सुपर सिक्स में उसका खाता तक नहीं खुला था। वहीं पाकिस्तान पहले ही चार अंकों के साथ मज़बूत स्थिति में था। जीतना भारत के लिए अस्तित्व का सवाल बन गया था।

अजहरुद्दीन की कप्तानी और भारत की बल्लेबाजी

भारतीय टीम की कप्तानी मोहम्मद अजहरुद्दीन के हाथों में थी। टॉस जीतकर अजहर ने पहले बल्लेबाजी का फैसला लिया। शुरुआत में भारत ने संभलकर खेला लेकिन पाकिस्तानी गेंदबाजी के आगे रन बनाना आसान नहीं था।

• सचिन तेंदुलकर ने 45 रनों की संघर्षपूर्ण पारी खेली।

• राहुल द्रविड़ ने 61 रनों की ठोस पारी से पारी को संबल दिया।

• कप्तान अजहरुद्दीन ने 59 रन बनाकर जिम्मेदारी दिखाई।

अन्य बल्लेबाजों का योगदान छोटा रहा।सदगोपन रमेश ने 20, अजय जडेजा ने 6, रॉबिन सिंह ने 16 और नयन मोंगिया ने 6 रन बनाए। अंततः भारत ने 50 ओवरों में 6 विकेट खोकर 227 रन बनाए।

इस स्कोर को देखकर लग रहा था कि पाकिस्तान के लिए लक्ष्य मुश्किल नहीं होगा।

भारतीय गेंदबाजों का जबरदस्त प्रदर्शन

भारत की जीत की संभावना भले ही कमजोर लग रही थी, लेकिन गेंदबाजों ने मैच की तस्वीर बदल दी।

• जवागल श्रीनाथ ने शाहिद अफरीदी को पारी की शुरुआत में ही आउट कर भारत को बड़ी राहत दिलाई।

• इसके बाद एजाज अहमद भी ज्यादा देर टिक नहीं सके।

लेकिन असली कहानी तब शुरू हुई जब वेंकटेश प्रसाद मैदान में आए। पाकिस्तान के खिलाफ उनकी धारदार गेंदबाजी हमेशा चर्चा में रहती थी और इस मैच में तो वे आग बनकर टूट पड़े।

उन्होंने एक के बाद एक बड़े विकेट लिए—

• सईद अनवर

• इंजमाम-उल-हक

• सलीम मलिक

• मोइन खान

• वसीम अकरम

वेंकटेश प्रसाद ने महज 27 रन देकर 5 विकेट झटके और पाकिस्तान की बल्लेबाजी की रीढ़ तोड़ दी।

पाकिस्तान की हार और भारत की जीत

पाकिस्तान की टीम बड़े खिलाड़ियों से भरी हुई थी। सईद अनवर, इंजमाम, मोइन और वसीम जैसे दिग्गजों के रहते हुए भी पूरी टीम 180 रन पर सिमट गई।

भारत ने यह मैच 47 रनों से जीत लिया।

• मैन ऑफ द मैच बने वेंकटेश प्रसाद, जिनकी घातक गेंदबाजी ने पाकिस्तान को पूरी तरह पस्त कर दिया।

यह जीत सिर्फ क्रिकेट की जीत नहीं थी, बल्कि यह उस दौर में भारतीय जनता के लिए मनोबल और आत्मविश्वास बढ़ाने का बड़ा कारण बनी।

कारगिल युद्ध की छाया

उस समय कारगिल में युद्ध चल रहा था। हर रोज़ देशवासियों तक खबरें पहुंच रही थीं कि जवान शहीद हो रहे हैं। ऐसे माहौल में पाकिस्तान पर क्रिकेट की जीत लोगों के लिए किसी राष्ट्रीय गर्व से कम नहीं थी।

लोग मानो कह रहे थे की सीमा पर सैनिक और मैदान पर खिलाड़ी, दोनों मिलकर पाकिस्तान को जवाब दे रहे हैं।

सोशल मीडिया के बिना भावनाओं का तूफान

आज के समय में भारत-पाकिस्तान मैच का मतलब होता है सोशल मीडिया पर मीम्स, ट्रोलिंग और टीवी चैनलों पर शोर-शराबा। लेकिन 1999 में ऐसा कुछ नहीं था। तब लोगों की भावनाएं ज्यादा सच्ची और गहरी थीं। घरों में, पान की दुकानों पर, चौराहों पर लोग रेडियो और टीवी से चिपककर मैच देख रहे थे। जीत के बाद देशभर में खुशी की लहर दौड़ गई थी।

निष्कर्ष: इतिहास का यादगार पन्ना

1999 वर्ल्ड कप का भारत-पाकिस्तान मैच सिर्फ एक खेल नहीं था। यह उस दौर की कहानी है जब क्रिकेट और देशभक्ति एक साथ बह रही थी। कारगिल युद्ध की पृष्ठभूमि में मिली यह जीत करोड़ों भारतीयों के दिलों में आज भी गर्व और उत्साह का संचार करती है।

वेंकटेश प्रसाद की पांच विकेट वाली गेंदबाजी, अजहरुद्दीन की कप्तानी, सचिन-द्रविड़ की पारी और पूरे देश का जोश… यह सब मिलकर इस मैच को भारतीय क्रिकेट इतिहास का अविस्मरणीय अध्याय बना देता है।

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