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भारत की विदेश नीति: अमेरिका, चीन और पाकिस्तान की चुनौतियों के बीच संतुलन का अद्भुत खेल

भारत की विदेश नीति पर उठते सवालों के बीच सच्चाई यह है कि आज भारत संतुलन, आत्मनिर्भरता और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है। जयशंकर की कूटनीति ने भारत को “नीति से नहीं, परिणाम से” परिभाषित किया है।

ओपिनियन

अरब स्प्रिंग से भारत कैसे बचा? पूर्वोत्तर की भूमिका और लोकतंत्र की ताक़त

2010 की अरब स्प्रिंग ने अरब देशों की राजनीति को हिला दिया, लेकिन भारत इस तूफ़ान से क्यों और कैसे बचा? ट्यूनीशिया से शुरू हुई यह आग मिस्र, लीबिया और सीरिया को तबाह कर गई, जबकि भारत ने लोकतंत्र, पूर्वोत्तर में राजनीतिक समाधान और मज़बूत सुरक्षा तंत्र के सहारे इसे झेला। पश्चिम और चीन ने भारत में भी अस्थिरता फैलाने की कोशिश की, पर यहाँ की सामाजिक विविधता, लोकतांत्रिक परंपराएँ और संवाद की संस्कृति ने तहरीर चौक जैसी स्थिति बनने नहीं दी। यही भारत की सबसे बड़ी ताक़त है।

भारत

भारत की विदेश नीति: डोवाल-जयशंकर युग का स्वर्णिम दौर

भारत की विदेश नीति को अक्सर आलोचना का सामना करना पड़ता है, लेकिन सच्चाई यह है कि आज भारत रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों के बीच संतुलन साधने में सफल रहा है।

विश्व

भारत-चीन-रूस त्रिकोण: यूरोप को झटका देने वाली डीजल डील

भारत ने चार साल में पहली बार चीन को डीजल भेजकर यूरोप को करारा जवाब दिया। यह सौदा भारत-रूस-चीन गठबंधन की मजबूती और नई ऊर्जा कूटनीति का प्रतीक है।

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