टार्टेरियन साम्राज्य और चीन की दीवार का रहस्य

सूर्यास्त की सुनहरी रोशनी में नहाई चीन की महान दीवार का हवाई दृश्य, पहाड़ियों पर फैली प्राचीन वास्तुकला के साथ।

क्या चीन की दीवार सच में चीनियों ने बनाई थी या यह टार्टेरियन साम्राज्य की धरोहर है? जानिए प्राचीन सभ्यता के रहस्य और इतिहास मिटाने की कहानी।

टार्टेरियन साम्राज्य और चीन की दीवार: दबी हुई सभ्यता का रहस्य

इतिहास अक्सर विजेताओं की कलम से लिखा जाता है, और हारने वालों की कहानियाँ धूल में दबा दी जाती हैं। लेकिन कभी-कभी, पत्थरों, खंडहरों और भूली हुई दीवारों में वो कहानियाँ फुसफुसाती हैं जिन्हें सुनने की हिम्मत हर कोई नहीं करता।

चीन की महान दीवार को हम सभी जानते हैं, लेकिन क्या हो अगर ये दीवार असल में चीनियों की न होकर किसी भूली-बिसरी अति-आधुनिक सभ्यता टार्टेरियन साम्राज्य की हो?

चीन की दीवार: किसके बचाव के लिए बनी?

फिल्म केसरी का वो दृश्य याद कीजिए, जब छत की दीवार अफगानों की ओर थी और हमारे सैनिक पीछे से हमला कर रहे थे। युद्ध-नीति का यही सिद्धांत कहता है कि दीवार का चेहरा शत्रु की ओर होता है।

अगर चीन की दीवार चीनियों ने बनाई होती, तो इसका रुख टार्टेरियन साम्राज्य की तरफ होना चाहिए था। लेकिन हकीकत उलटी है, ये दीवार चीन की ओर मुँह किए खड़ी है। क्या ये इस बात का संकेत नहीं कि असल में यह टार्टेरियन साम्राज्य ने चीन से बचाव के लिए बनाई थी?

टार्टेरियन साम्राज्य: मिटा दी गई सभ्यता

कहा जाता है, लगभग 1700 साल पहले टार्टेरियन साम्राज्य एक अत्याधुनिक और उन्नत सभ्यता थी। ऐसी तकनीक से संपन्न, जिसे आज भी विज्ञान पूरी तरह समझ नहीं पाया है। लेकिन इतिहास के पन्नों में इनके नाम का ज़िक्र भी मुश्किल से मिलता है।

क्यों?

क्योंकि ऐसा कोई भी रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से मिटा दिया गया।

• टार्टेरियन क्षेत्र समुद्र से घिरा नहीं था, फिर भी अचानक एक कीचड़ का सैलाब आया और पूरा साम्राज्य धरती में दफन हो गया।

• उनके महल आसमान को छूते थे और उनके शिखरों से विद्युत उत्पादन होता था।

• अमेरिका और यूरोप के 1800–1930 के बीच बने कई भवन इन्हीं डिज़ाइनों पर आधारित थे। पर इन्हें बिना कारण ढहा दिया गया, खासकर विश्वयुद्ध से ठीक पहले।

क्यों मिटाई जाती हैं उन्नत सभ्यताएँ?

दुनिया में जब भी कोई सभ्यता अपने समय से आगे निकलती है, तो उसे मिटा दिया जाता है। जैसे कोई गुप्त टाईम मशीन जिसे सबके हाथों में नहीं आने दिया जा सकता।

अगर आपके पास भविष्य देखने की ताकत हो, तो क्या आप उसे दुनिया से साझा करेंगे? या फिर उसे अपनी मुट्ठी में बंद रखेंगे?

इतिहास की सबसे बड़ी सच्चाई यही है की कई सभ्यताएँ प्राकृतिक आपदा से नहीं, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से नष्ट की गईं।

हिंदू सभ्यता: बची तो कैसे?

दुनिया में सिर्फ एक सभ्यता है जिसने अपने प्राचीन मंदिरों को जीवित रखा वो है हिंदू सभ्यता।

हमने भले कर्मकांड के नाम पर उनका महत्व भुला दिया हो, लेकिन इस बहाने उन्हें बचाए रखा।

शायद इसी वजह से भारत पर सबसे ज़्यादा हमले हुए, ताकि इस संस्कृति को भी टार्टेरियन की तरह मिटाया जा सके।

रहस्यमयी स्थलों का मौन

क्या आपने कभी सोचा है, रावण के महल वाली जगह पर आज भी सैटेलाइट सिग्नल क्यों काम नहीं करते? अयोध्या में भी कुछ स्थान ऐसे हैं।

क्या ये वही स्थान हैं जहाँ कभी टार्टेरियन जैसी वास्तुकला थी, जो धरती में धँस गई?

विद्युत तरंगें आज भी वहाँ मौजूद हैं मानो कोई अदृश्य शक्ति उन्हें संभाले बैठी हो।

रामायण, महाभारत और अति-आधुनिक युग

रामायण और महाभारत को अक्सर पौराणिक कथा कहकर नकार दिया जाता है, लेकिन क्या ये असल में उसी उन्नत सभ्यता का इतिहास थे?

कृष्ण ने शांति प्रस्ताव के समय चेतावनी दी थी कि “युद्ध हुआ तो नगर नष्ट हो जाएंगे, ज्ञान लुप्त हो जाएगा।”

युद्ध हुआ, और सभ्यता टार्टेरियन की तरह मिट गई। आज हमें उस युग का कोई ठोस ज्ञान नहीं, बस मिथक का नाम देकर छोड़ दिया गया।

द्वारका और टार्टेरियन का पैटर्न

द्वारका के समुद्र में डूबने की कहानी भी टार्टेरियन सैलाब जैसी लगती है।

दुनिया की हर उन्नत सभ्यता एक ही पैटर्न से खत्म हुई और कभी उन्हें पुनर्जीवित करने की कोशिश नहीं हुई।

क्या ये सब सिर्फ संयोग है? या कोई गहरी साजिश?

निष्कर्ष: इतिहास के अंधेरे में छिपा सच

टार्टेरियन साम्राज्य की दीवारें, प्राचीन मंदिरों की धड़कन, और इतिहास की खोई हुई पंक्तियाँ… ये सब मिलकर हमें बताते हैं कि दुनिया का सच वैसा नहीं जैसा किताबों में लिखा है।

शायद सच्चाई वही है जिसे हम देख नहीं पाते, या जिसे देखने की अनुमति हमें कभी दी ही नहीं गई।

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