ट्रंप का 50% टैरिफ और मोदी का इनकार: असली वजह क्या थी?

डोनाल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी का गंभीर अभिव्यक्ति वाला चित्र, दोनों अलग-अलग फ्रेम में।

ट्रंप द्वारा भारत पर 50% टैरिफ लगाने की असली वजह मोदी का व्हाइट हाउस निमंत्रण ठुकराना था, न कि रूसी तेल। जानें पूरी कहानी।

अमेरिका और भारत के रिश्ते अक्सर उतार-चढ़ाव से गुजरते रहे हैं। हाल ही में न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में यह बड़ा खुलासा हुआ कि डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ इसलिए लगाया क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके व्हाइट हाउस निमंत्रण को ठुकरा दिया था। दिलचस्प बात यह है कि इस फैसले का भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने से कोई लेना-देना नहीं था।

असल विवाद की जड़ थी – ट्रंप की नोबेल शांति पुरस्कार पाने की महत्वाकांक्षा, और मोदी का उस “फोटो-ट्रैप” का हिस्सा बनने से इनकार, जिसमें भारत को पाकिस्तान के साथ बराबरी पर खड़ा करने की कोशिश हो रही थी।

ट्रंप और नोबेल शांति पुरस्कार की जिद (Trump Nobel Prize Ambition)

डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से खुद को नोबेल शांति पुरस्कार का हकदार मानते रहे हैं।

• भारत-पाकिस्तान सीज़फायर के बाद उन्होंने दावा किया कि उन्होंने युद्ध रुकवाने में अहम भूमिका निभाई।

• इतना ही नहीं, उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को उन्हें नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकित करना चाहिए।

लेकिन हकीकत यह थी कि सीज़फायर पूरी तरह भारत और पाकिस्तान के बीच तय हुआ था, और मोदी ने कभी ट्रंप के दावों का समर्थन नहीं किया।

मोदी का सख्त जवाब: “सीज़फायर भारत-पाकिस्तान ने ही तय किया”

ट्रंप की उम्मीदों के उलट, प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कर दिया कि सीज़फायर में अमेरिका की कोई भूमिका नहीं थी।

• संसद में भी मोदी सरकार ने यही बयान रखा।

• ट्रंप के बार-बार किए गए दावों को भारत ने कभी मान्यता नहीं दी।

यहीं से ट्रंप की नाराज़गी शुरू हुई।

व्हाइट हाउस का “फोटो-ट्रैप” और मोदी का इनकार (White House Invitation Rejection)

ट्रंप चाहते थे कि जी7 शिखर सम्मेलन के बाद मोदी अमेरिका आएं और व्हाइट हाउस में एक साझा फोटो-ऑप हो।

सूत्रों के अनुसार:

• उस तस्वीर में पाकिस्तान के आर्मी चीफ़ असीम मुनीर को भी शामिल किया जाना था।

• ट्रंप की रणनीति थी कि इस “हैंडशेक फोटो” को नोबेल शांति पुरस्कार के दावे के लिए इस्तेमाल किया जाए।

लेकिन भारतीय अधिकारियों ने तुरंत खतरे को भांप लिया।

मोदी ने इसे साफ तौर पर “इमेज गेम” बताया और इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया।

रणनीतिक चुप्पी: मोदी का जवाब

ट्रंप ने कई बार मोदी को कॉल किया और व्हाइट हाउस आने का निमंत्रण दोहराया।

लेकिन मोदी ने:

• कॉल्स को नजरअंदाज किया।

• वॉशिंगटन रुकने का प्रस्ताव ठुकरा दिया।

• और अपनी “रणनीतिक चुप्पी” बनाए रखी।

भारत का संकेत साफ था – दिल्ली किसी और की नोबेल महत्वाकांक्षा में खुद को मोहरा नहीं बनाएगा।

ट्रंप का गुस्सा और 50% टैरिफ का फैसला

मोदी के इस इनकार से ट्रंप आक्रोशित हो गए।

• उन्हें वह हैंडशेक फोटो नहीं मिल पाया।

• उनके नोबेल अभियान की नींव कमजोर पड़ गई।

• और नतीजा यह हुआ कि उन्होंने भारत पर 50% टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया।

यानी, जो कदम आर्थिक वजहों या रूस-भारत व्यापार से जुड़ा माना जा रहा था, उसकी असली वजह ट्रंप की व्यक्तिगत नाराज़गी थी।

ट्रंप का जुनून और उसकी राजनीतिक कीमत

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप का नोबेल पुरस्कार को लेकर जुनून अस्वस्थ स्तर पर पहुंच चुका है।

• यह जुनून अब उनके लिए मानसिक विकृति जैसा हो गया है।

• नतीजा: वे बेवजह टैरिफ वॉर शुरू कर बैठे हैं।

• इसका खामियाज़ा न केवल भारत और अन्य देशों को भुगतना पड़ेगा, बल्कि अमेरिकी जनता पर भी महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ेगा।

अगर यह सिलसिला जारी रहा, तो यह ट्रंप की राजनीतिक स्थिति और राष्ट्रपति पद की कुर्सी को भी खतरे में डाल सकता है।

निष्कर्ष

भारत पर 50% टैरिफ लगाने के पीछे असली कारण आर्थिक या भू-राजनीतिक नहीं था। इसकी जड़ें डोनाल्ड ट्रंप की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा और प्रधानमंत्री मोदी के रणनीतिक इनकार में छिपी थीं।

मोदी ने एक समझदारी भरा कदम उठाते हुए अमेरिका के “फोटो-ट्रैप” से बचाव किया और भारत की गरिमा को बनाए रखा। वहीं, ट्रंप ने अपनी नाराज़गी को अंतरराष्ट्रीय व्यापार में उतारकर दिखा दिया कि उनके लिए व्यक्तिगत छवि और नोबेल पुरस्कार की लालसा, वैश्विक स्थिरता से ज्यादा महत्वपूर्ण है।

अंततः यह विवाद हमें यही सिखाता है कि सशक्त नेतृत्व का मतलब केवल आक्रामकता नहीं, बल्कि सही समय पर सही चुप्पी और दृढ़ता भी है।

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