जॉनी लीवर का संघर्ष और सफलता की कहानी: मौत से हंसी तक का सफ़र

काले सूट में हँसते और मज़ाकिया अंदाज़ में हाथ उठाए हुए मशहूर कॉमेडियन जॉनी लीवर का चित्र।

बचपन का संघर्ष और मौत से सामना

बॉलीवुड के सबसे बड़े कॉमेडियन जॉनी लीवर का जीवन जितना हंसी से भरा हुआ दिखता है, उतना ही दर्दनाक भी रहा है।

साल 1957 में आंध्रप्रदेश के एक साधारण परिवार में जन्मे जॉनी का बचपन मुंबई की झोपड़पट्टियों और अपराध से भरी गलियों में गुज़रा।

सिर्फ़ 13 साल की उम्र में वो अपनी ज़िंदगी खत्म करने के लिए रेलवे ट्रैक पर बैठ गए थे। सामने से ट्रेन आ रही थी, लेकिन उसी पल उन्हें अपनी तीनों बहनों का चेहरा याद आ गया।

जॉनी को लगा – “अगर मैं चला गया तो इनका क्या होगा?” और उन्होंने फौरन आत्महत्या का विचार छोड़ दिया।

यह पल जॉनी के जीवन का सबसे बड़ा मोड़ था। अगर उन्होंने उस दिन हिम्मत हार दी होती, तो शायद दुनिया कभी उनकी कॉमेडी और अभिनय का जादू न देख पाती।

पिता की शराब और हिंसा का दर्द

जॉनी लीवर ने कई बार यह स्वीकार किया कि उनके पिता शराब पीकर मारपीट करते थे। इसी वजह से उनका बचपन डर और तनाव से भरा हुआ था। एक पॉडकास्ट में उन्होंने कहा –

“अगर मैं कलाकार नहीं बनता तो शायद गुंडा-बदमाश बन जाता।”

मुंबई की गलियों में पलकर उन्होंने कम उम्र में ही मारपीट, क्राइम और मौत सब देखा। सात साल की उम्र में उन्होंने पहली बार किसी की हत्या के बाद डेड बॉडी देखी थी।

जब सेट पर उबल पड़ा गुस्सा

बॉलीवुड में काम करते समय भी जॉनी का सीधा-सादा दिल कई बार झलकता था। एक बार बांद्रा में शूटिंग के दौरान बिकनी सीन कर रही अभिनेत्री को देखकर एक रिक्शा वाला अजीब नज़रों से घूरने लगा।

जॉनी को यह बहुत बुरा लगा और वो गुस्से से उस पर टूट पड़ने वाले थे। जॉनी ने कहा था –

“मैं उसका मुंह तोड़ देता, उसे पता भी नहीं चलता कि क्या हुआ। हम लोग तो बचपन से ही स्ट्रीट फाइटर टाइप रहे हैं।”

बहन की मौत और स्टेज का वादा

जॉनी लीवर का जीवन सिर्फ़ हंसी तक सीमित नहीं रहा। एक शो के दिन ही उनकी बहन की मौत हो गई। परिवार के दुख और स्टेज की जिम्मेदारी के बीच फंसे जॉनी ने वादा निभाने का फ़ैसला किया।

वो टैक्सी में ही कपड़े बदलकर शो करने पहुंचे और पूरा परफ़ॉर्मेंस दिया। लेकिन शो खत्म होते ही बिना पैसे लिए सीधे घर लौट आए। यह घटना दिखाती है कि जॉनी सिर्फ़ कॉमेडियन ही नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार इंसान भी हैं।

अनिल कपूर संग मज़ेदार प्रैंक

फिल्म तेज़ाब की शूटिंग के दौरान जॉनी ने अनिल कपूर को शत्रुघ्न सिन्हा की आवाज़ में फोन किया। अनिल कपूर ने सोचा कि सच में “भाईजी” का फोन है और बड़े सम्मान से बात करने लगे।

कुछ देर बाद जब जॉनी ने राज खोला तो अनिल कपूर ने हंसते हुए कहा –

“तेरी ऐसी की तैसी, जॉनी।”

ऐसी शरारतें ही जॉनी लीवर को इंडस्ट्री का सबसे चहेता इंसान बनाती हैं।

हंसी के पीछे छुपा दर्द

आज जॉनी लीवर 68 साल के हो चुके हैं। उन्होंने बॉलीवुड में सैकड़ों फिल्मों में अपनी कॉमेडी से लोगों को हंसाया। लेकिन उनकी कहानी बताती है कि हंसी के पीछे गहरा दर्द और संघर्ष छुपा हुआ है।

अगर उन्होंने उस दिन आत्महत्या कर ली होती, तो हिंदी सिनेमा शायद अपने सबसे बड़े कॉमेडियन को खो देता।

निष्कर्ष

जॉनी लीवर की ज़िंदगी हमें यह सिखाती है कि चाहे हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, कभी हार नहीं माननी चाहिए।

रेलवे ट्रैक से उठकर स्टेज तक का यह सफ़र बताता है कि इंसान अगर डटे रहे तो जिंदगी उसे हंसने के हज़ारों मौके देती है।

जॉनी लीवर का नाम हमेशा हिंदी सिनेमा के सुनहरे पन्नों में दर्ज रहेगा –

क्योंकि उन्होंने हमें सिर्फ़ हंसाया ही नहीं, बल्कि जीना भी सिखाया।

FAQ (People Also Ask)

प्रश्न 1: जॉनी लीवर ने आत्महत्या की कोशिश क्यों की थी?

उत्तर: पिता की शराब और घरेलू हिंसा से परेशान होकर 13 साल की उम्र में उन्होंने रेलवे ट्रैक पर बैठकर आत्महत्या करने का विचार किया था।

प्रश्न 2: जॉनी लीवर का असली नाम क्या है?

उत्तर: जॉनी लीवर का असली नाम जॉन प्रकाश राव जनुमाला है।

प्रश्न 3: जॉनी लीवर को पहला बड़ा ब्रेक कब मिला?

उत्तर: उन्हें पहला बड़ा मौका फिल्म जलवा (1987) में मिला, जहां उनकी कॉमेडी को काफी सराहा गया।

प्रश्न 4: जॉनी लीवर ने कितनी फिल्मों में काम किया है?

उत्तर: उन्होंने 350 से ज्यादा हिंदी फिल्मों में काम किया है और कई बार फिल्मफेयर अवॉर्ड्स से सम्मानित भी हुए हैं।

प्रश्न 5: जॉनी लीवर को “कॉमेडी किंग” क्यों कहा जाता है?

उत्तर: उनकी अनोखी टाइमिंग, मिमिक्री और चेहरे के हावभाव ने उन्हें बॉलीवुड का सबसे बड़ा कॉमेडियन बना दिया।

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